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प्रकार के व्यापारियों

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जीएसटी बढ़ाने के विरोध में लाइट बंद कर थाली बजाएंगे व्यापारी

इंदौर। जीएसटी (GST) बढ़ाने प्रकार के व्यापारियों का विरोध कर रहे कपड़ा व्यापारी (Textile Dealers) अब लगातार सरकार (government) से टैक्स की दर कम करने के लिए आंदोलन करेंगे। व्यापारियों की बैठक में इसको लेकर सहमति बनी। जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) से मिलकर व्यापारी इसका विरोध भी जताएंगे तो लाइटबंद करके थाली बजाकर विरोध भी किया जाएगा।

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कपड़ा व्यापारियों (Textile Dealers) के साथ-साथ अब बाजार के एजेंट भीआ गए प्रकार के व्यापारियों हैं। कल क्लाथ मार्र्केट में हुई बैठक में व्यापारियों ने आंदोलन की रणनीति बनाई। व्यापारियों ने कहा कि पहले सरकार (Government) ने 5 प्रतिशत टैक्स कपड़े पर लगाकर कहा था कि किसी प्रकार टैक्स नहीं लगाया जाएगा, लेकिन अब इस पर 7 प्रतिशत और बढ़ोतरी कर इसे 12 प्रतिशत पर किया जा रहा है। इससे आम लोगों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा और कपड़ा महंगा हो जाएगा। पहले भी कोरोना के कारण कपड़ा मार्केट (Textile Market) घाटे से उबर नहीं पाया है। कल बाजार में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि अभी शांतिपूर्ण आंदोलन कर सरकार को बताना है कि हम टैक्स वृद्धि के खिलाफ है। बैठक में क्लाथ मार्केट संस्था के अध्यक्ष हंसराज जैन, रजनीश चौरडिय़ा, कैलाश मूंगड़ (President Hansraj Jain, Rajneesh Chordia, Kailash Moongad) सहित कई व्यापारी मौजूद थे। बैठक में यह भी तय हुआ आम उपभोक्ताओं को भी उनके साथ जोडक़र आंदोलन में शामिल किया जाए। इके लिए आज से कपड़ा मार्केट में पोस्ट कार्ड लिखने की शुरूआत की गई है। 1 लाख पोस्ट कार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे जाएंगे तो हस्ताक्षर अभियान भी चला जाएगा। इसके साथ ही बाजार की लाइट बंद रखकर थाली बजाई जाएगी, जैसा कोरोना काल (Corona period) में किया गया था। हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं की गई है। कार्यकारिणी सदस्य अरूण बाकलीवाल (Executive member Arun Bakliwal) ने बताया कि हम कोरोना से पहले ही परेशान हैं और हम भी नहीं चाहते हैं कि आंदोलन में वक्त बर्बाद हो। इसलिए सरकार से मांग है कि वह व्यापारियों के हित में निर्णय लेकर टैक्स में किसी प्रकार वृधि न करें।

पैकटबंद, लेबल वाले खाद्य पदार्थों पर GST लगाने से व्यापारियों में आक्रोश, ब्रांडेड सामान को पहुंचेगा फायदा: CAIT

कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पैक किए अथवा लेबल लगाए गए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों एवं कुछ अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश पर देश के खाद्यान्न व्यापारियों में बेहद रोष एवं आक्रोश है.

Published: July 4, 2022 5:19 PM IST

प्रतीकात्मक फोटो

पैक किए गए और लेबल वाले खाद्य पदार्थों पर पांच प्रतिशत माल एवं सेवा कर (GST) लगाने से खाद्यान्न व्यापारियों को नुकसान होगा. इससे व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा और रोजमर्रा के इस्तेमाल का प्रकार के व्यापारियों जरूरी सामान भी महंगा होगा. व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट-CAIT) ने सोमवार को यह बात की. कैट ने यह भी कहा कि संगठन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से मिलकर इस फैसले पर फिर से विचार करने को कहेगा.

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GST परिषद ने पिछले दिनों अपनी बैठक में डिब्बा या पैकेट बंद और लेबल युक्त (फ्रोजन को छोड़कर) मछली, दही, पनीर, लस्सी, शहद, सूखा मखाना, सूखा सोयाबीन, मटर जैसे उत्पाद, गेहूं और अन्य अनाज तथा मुरमुरे पर 5 प्रतिशत GST लगाने का फैसला किया था. कर की दर में किए गए बदलाव 18 जुलाई से प्रभाव में आएंगे.

कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पैक किए अथवा लेबल लगाए गए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों एवं कुछ अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश पर देश के खाद्यान्न व्यापारियों में बेहद रोष एवं आक्रोश है.

व्यापारी संगठन ने इस कदम को छोटे विनिर्माताओं एवं व्यापारियों के हितों के खिलाफ करार दिया गया, और कहा कि इस फैसले से ब्रांडेड सामान को प्रकार के व्यापारियों फायदा पहुंचेगा.

खंडेलवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर देश के सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों को ज्ञापन देकर इस फैसले को वापिस लेने की मांग की जाएगी.

इस मौके पर मौजूद दिल्ली खाद्यान्न व्यापार संघ के अध्यक्ष नरेश गुप्ता और दाल मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप जिंदल ने बताया कि इस संबंध में देशभर के अनाज व्यापार संगठनों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और सभी संगठन इस निर्णय से बेहद नाराज हैं.

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व्यावसायिक कर को लेकर भड़के भाबर के व्यापारी

संवाद सहयोगी, कोटद्वार : व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कर लगाए जाने को लेकर व्यापारियों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। इसके विरोध में झंडीचौड़ व किशनपुरी व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने तत्काल कर वापस लेने की मांग की। मांग न माने जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। गुरुवार को झंडीचौड़ व किशनपुरी के व्यापारी नगर निगम कार्यालय में पहुंचे और महापौर हेमलता नेगी व नगर आयुक्त किशन सिंह नेगी का घेराव किया। व्यापारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों में आगामी दस सालों तक किसी भी प्रकार का कर न लगाए जाने की घोषणा की है। लेकिन, नगर निगम व्यापारियों को लगातार व्यावसायिक टैक्स को लेकर नोटिस भेज रहा है, जिससे व्यापारियों में रोष बढ़ रहा है। कहा कि भाबर क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां कम होने से व्यापारियों को फायदा नहीं हो रहा है। व्यापारी पहले भी कई प्रकार के करों का भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में व्यावसायिक कर लगाने से व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। व्यापारियों ने कहा कि नगर निगम व्यापारियों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दे रहा है। नगर क्षेत्र में सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है व वार्डों में लाइटें खराब रहती है। सीवर की सुविधा भी नहीं है व सड़कें भी बदहाल हैं। ऐसे में व्यावसायिक कर लगाना व्यापारियों के साथ धोखा है। महापौर हेमलता नेगी द्वारा व्यापारियों की समस्या को शासन तक अवगत कराए जाने के आश्वासन के बाद व्यापारी शांत हुए। नगर आयुक्त किशन सिंह नेगी ने कहा कि निगम शासन के आदेशों का पालन कर रहे है। कहा कि शासन स्तर पर मिलने वाले निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा। इस मौके पर झंडीचौड व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनोद धूलिया, किशनपुरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील थपलियाल, विकास कुकरेती, रमन तोमर, अनुसुया पांडे, गोविंद, राजीव डबराल मौजूद थे।

व्यापार बन्धु की बैठक में जिलाधिकारी ने दिए आवश्यक निर्देश: सभी व्यापारी जीएसटी पंजीयन कराएं : डीएम

देवरिया में विकास भवन स्थित गांधी सभागार में व्यापार बंधु की बैठक हुई। बैठक में सभी व्यापारियों से जीएसटी पंजीयन जागरूकता अभियान के तहत पंजीकरण करा कर विभिन्न प्रकार का लाभ उठाने प्रकार के व्यापारियों की अपील की। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रकार के व्यापारियों जीएसटी पंजीयन के साथ ही पंजीकृत व्यापारी को बिना प्रीमियम के दस लाख रुपए की व्यापारी दुर्घटना बीमा का लाभ उपलब्ध हो जाएगा।

बैंकों से लोन और सप्लाई आर्डर के लिए जीएसटी जरूरी
अंतर राज्यीय माल/सेवा आपूर्ति के लिए जीएसटी पंजीयन की अनिवार्यता है। वित्तीय संस्थानों, बैंकों से लोन प्राप्त करने में सहायता मिलती है। शासकीय, अर्धशासकीय विभागों में सप्लाई वर्क आर्डर के लिए भी जीएसटी पंजीयन आवश्यक है।

आनलाईन कर सकते हैं पंजीकरण
जिलाधिकारी ने बताया कि जीएसटी प्रणाली अत्यंत सरल है और इससे जुड़े सभी कार्य घर बैठे ऑनलाइन किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी सरकारी कार्यालय में आने की आवश्यकता नहीं है। शून्य खरीद-बिक्री के संबंधित रिटर्न एसएमएस के माध्यम से भी दाखिल करने की सुविधा है। उन्होंने बताया कि जीएसटी पंजीयन ऑनलाइन www.gst.gov.in पर किया जा सकता है। इसके लिए पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार या डिजिटल सिगनेचर, बैंक खाते का प्रमाण, आवास और व्यापार स्थल के पते का प्रमाण और एक पहचान पत्र की आवश्यकता होती है।

पूर्व विधायक ने व्यापारी हितों में उठाया मुद्दा
जिलाधिकारी ने बैठक में व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं पर व्यापक विमर्श भी किया। पूर्व विधायक और उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष रविंद्र प्रताप मल्ल ने व्यापारियों की प्रमुख समस्याओं को उठाया। जनपद व्यापार मंडल के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने परमार्थी पोखरा तथा न्यू कॉलोनी में यूरिनल सुविधायुक्त शौचालय बनाने की मांग की । विष्णु अग्रवाल द्वारा कसया ढाले के पास लगने वाले जाम की समस्या उठायी गई, जिस पर जिलाधिकारी ने रेलवे रैक पॉइंट को किसी अन्य स्थान पर स्थनांतरित करने के लिए रेलवे से पत्राचार करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त प्रमुख बाजारों में प्रकाश व सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए व्यापार बंधु को आश्वस्त किया।

ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक प्रकार के व्यापारियों में मुख्य विकास अधिकारी रवींद्र कुमार, उपायुक्त वाणिज्य कर पंकज लाल, एलडीएम अरुणेश कुमार, व्यापारी नेता पुरषोत्तम मरोदिया, सुबोध जयसवाल, प्रेम कुमार अग्रवाल ,अमित कुमार सिंह संदीप कुमार बरनवाल सहित प्रकार के व्यापारियों विभिन्न लोग उपस्थित

जीएसटी पंजीयन के साथ मिला इंश्योरेंस बना सहारा
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया प्रकार के व्यापारियों कि जीएसटी पंजीयन के साथ मिलने वाला इंश्योरेंस अत्यंत उपयोगी है। मेसर्स तिवारी ब्रदर्स, सुविखर के फर्म स्वामी प्रमोद शंकर तिवारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मंजू देवी को दस लाख रुपए का इंश्योरेंस लाभ मिला। इसी प्रकार मेसर्स प्रताप ट्रेडर्स, गरूलपार के फर्म स्वामी अजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनके आश्रित विनोद कुमार सिंह को दस लाख रुपये जीएसटी पंजीयन के साथ बिना किसी प्रीमियम के मिलने वाले दुर्घटना बीमा योजना के तहत मिला।

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