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या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है?

या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई विदेशी मुद्रा या अन्य परिसंपत्तियां हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा (foreign exchange), गोल्ड रिजर्व( Gold reserve, एसडीआर और आईएमएफ कोटा डिपाजिट(), ट्रेज़री बिल (Treasury bills), बॉन्ड और अन्य सरकारी प्रतिभूतियों () शामिल होतीं हैं। जरूरत पड़ने पर इस भंडार से देनदारियों का भुगतान किया जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व भी कहा जाता है। RBI (Reserve Bank Of India) भारत में विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक है।
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क्या कभी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बेहद चिंताजनक हालत में पहुंचा है? जानिए इसके पीछे की सच्चाई

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किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार या फॉरेक्स रिजर्व एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. दरअसल, वैश्वीकरण के इस दौर में सभी देश एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं. वैश्वीकरण से देशों के या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है? बीच आवश्यक वस्तुओं या सेवाओं का आदान प्रदान आसान होता है. ये इसलिए जरूरी है क्योंकि एक देश में सब कुछ मौजूद या उत्पादित नहीं हो सकता है. इस स्थि‍ति में विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व बढ़ जाता है.

दरअसल, फॉरेक्स रिजर्व या विदेशी मुद्रा भंडार (Forex या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है? reserve) ऐसी संपत्तियां (assets) हैं जो किसी देश के केंद्रीय बैंक या मौद्रिक प्राधिकरण (monetary authority) द्वारा होल्ड की या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है? जाती हैं. फॉरेक्स रिजर्व का मुख्य उद्देश्य 'बैकअप फंड' तैयार करना है, जिसे कोई भी देश आर्थिक इमरजेंसी में इस्तेमाल कर सकता है.

इकोनॉमी के लिए क्यों जरूरी है फॉरेक्स रिजर्व? या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है?

देश की इकॉनमी में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर नवंबर 1990 में सात महीनों के शासन काल में देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। तब भारत की इकॉनमी भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया। उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था। हालात यह हो गई थी कि इतनी रकम तीन हफ्तों के आयात के लिए पर्याप्त नहीं थी।

किसी भी वस्तु या सेवा की क़ीमत उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। अगर रुपए की मांग कम है तो उसकी क़ीमत भी कम होगी और डॉलर की मांग ज़्यादा है, लेकिन उसकी आपूर्ति कम है तो उसकी क़ीमत ज़्यादा होगी। आपूर्ति तब ही पर्याप्त होगी जब उस देश का या विदेशी मुद्रा बाजार कब खुलता है? विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त होगा।

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