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शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है

शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है

Demat Daka: शेयर बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता क्यों है? देखिए Zee Business का स्पेशल इन्वेस्टिगेशन

अनिल सिंघवी का कहना है कि हम हैरान है कि ब्रोकर्स और एक्सचेंज साइबर अटैक को मानने के लिए तैयार नहीं. Zee Business का उद्देश्य ब्रोकर्स, डिपॉजिटरी, एक्सचेंजों को घोटालों से सचेत करना है. शेयर बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता क्यों है? देखिए Zee Business का स्पेशल इन्वेस्टिगेशन शो 'ऑपरेशन डीमैट डाका' - EPISODE 2.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज क्या है? इतिहास, उद्देश्य और कार्य

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज क्या है? इतिहास, उद्देश्य और कार्य

दोस्तों, क्या आप जानते है शेयर मार्किट में एनएसई (NSE) क्या है? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ा? इसके क्या फायदे है? यह कैसे काम करता है? आईये आज हम इसके विस्तार से जानते है। एनएसई (NSE) भारत का सबसे बड़ा वित्तीय बाजार है और दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजार में से एक है। इसकी स्थापना 1992 में हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय शेयर बाजार में पारदर्शिता लाना है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) क्या है ?

एनएसई (NSE) का पूरा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड है यह भारत का सबसे बड़ा वित्तीय बाजार है और दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजार में से एक है। इसकी स्थापना 1992 में हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय शेयर बाजार में सरल और पारदर्शी बनाना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार में निवेश कर सके। सन 1994 में एनएसई (NSE) ने पहली बार भारतीय शेयर बाजार में इलेट्रॉनिक ट्रेडिंग की शुरुवात किया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का इतिहास

1992 के प्रसिद्ध घोटाले के बाद, जिसमें एक प्रसिद्ध निवेशक ने भारतीय शेयर बाजार में हेरफेर किया गया था। तब वित्त मंत्रालय ने भारत सरकार तहत, निवेशकों तक शेयर बाजार को आसानी से पहुंचने के उद्देश्य से एनएसई की स्थापना का निर्णय लिया गया था। इसकी संस्था की स्थापना की सिफारिस M.J. शेरवानी समिति ने भी किया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भारत का सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से एक विकसित स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना सन 1992 में 25 करोड़ पूँजी के साथ मुंबई में किया गया। एनएसई का प्रमुख सूचकांक, निफ्टी 50 है, इसके अंतर्गत 50 कम्पनियाँ रजिस्टर्ड है। सूचकांक में सम्मिलित कंपनियों का समय-समय का आकलन किया जाता है और पुरानी कंपनियों के स्थान पर वे नयी सर्वोत्तम कम्पनीयों को शामिल किया जाता है | इसका उपयोग निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर भारत और दुनिया भर में भारतीय पूंजी बाजार के बैरोमीटर के रूप में किया जाता है। एनएसई (NSE) द्वारा 1996 में NIFTY 50 इंडेक्स आरम्भ किया गया था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का उद्देश्य

एनएसई (NSE) के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है।

  1. सभी निवेशकों को शेयर बाजार में निवेश करने तथा शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा प्रदान करना |
  2. सभी निवेशक सामान रूप से प्रतिभूति को खरीद और बेच सके।
  3. शेयर बाजार को निष्पक्ष, पारदर्शी और दक्ष बनाना।
  4. ख़रीदे और बेचे गए शेयर को अल्प समय में हस्तानांतरित करना।
  5. प्रतिभूति बाजार को अंतरास्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप स्थापित करना।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कार्य

दोस्तों ,अब हम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के कार्य प्रणाली के बारें में विस्तार से जानेंगे।

अगर कोई निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से शेयर बाज़ार में निवेश करना चाहता है तो सबसे पहले उसको मार्किट आर्डर के द्वारा आर्डर देना होता है , और कंप्यूटर ट्रेडिंग जो एक स्वचालित प्रक्रिया है के माध्यम से आपके आर्डर का मिलान किया जाता है। जब कोई निवेशक मार्किट आर्डर देता है तो उसे एक नंबर दिया जाता है जिसको यूनिट नंबर कहा है। कंप्यूटर ट्रेडिंग में खरीदने और बेचने व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाता है। खरीदने वाले व्यक्ति को बेचने वाले व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं रहता है और बेचने वाले व्यक्ति को खरीदने वाले व्यक्ति की कोई जानकारी नहीं रहता है।

जब आपका आर्डर को कोई मिलान नहीं मिलता है तो आर्डर के क्रम को मिलाने के लिए आर्डर सूची से जोड़ा जाता है, और यह प्राइस टाइम (Price time) के प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित किया जाता है। सर्वोत्तम मूल्य के आर्डर को पहले प्राथमिकता दिया जाता है और एकसमान मूल्य वाले आर्डर को पहले आर्डर के आधार पर प्राथमिकता दिया जाता है।

जब निवेशक का आर्डर एक्सचेंज मार्किट में पूरा हो जाता है तो निवेशक के डीमैट अकाउंट में खरीद आर्डर या बेच आर्डर में स्वतः ही देखने लगता है। इस तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों के शेयर के लेन देन को पारदर्शी बनता है। डीमैट अकाउंट किसी भी स्टॉक ब्रोकर के द्वारा ओपन किया जा सकता है जो ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करता है। जो ट्रेडिंग सिस्टम में ऑर्डर देते हैं। एनएसई द्वारा घोषित छुट्टियों को छोड़कर, एक्सचेंज मार्केट सप्ताह में पांच दिन सोमवार से शुक्रवार तक उपलब्ध रहता है।

दोस्तों, हमने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के बारें में विस्तार से समझा। अब आप समझ गए है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज स्थापना प्रतिभूति बाज़ार को निष्पक्ष, पारदर्शी और दक्ष बनाने के लिए किया गया, जिससे सभी निवेशक विश्वास के साथ प्रतिभूति बाज़ार में निवेश कर सके। अगर आप भी शेयर मार्किट में निवेश करने के लिए सोच रहे है और आपको शेयर बाज़ार के बारें में ज्यादा जानकारी नहीं है शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है तो आप सेबी से पंजीकृत निवेश सलाहकार की सहायता ले सकते है यह आपको सही शेयर खरीदने में सहायता करेगा।

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अगर आप EPFO के सदस्य हैं तो जानें आपको ई-नामांकन फाइल करना क्यों है जरूरी

EPFO Update: अगर आप प्रइवेट या सरकारी नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ई-नामांकन फाइल करना क्यों जरूरी है? यह आपके परिवार को 7 लाख रुपये तक की सुरक्षा देता है।

अगर आप EPFO के सदस्य हैं तो जानें आपको ई-नामांकन फाइल करना क्यों है जरूरी

EPFO Update: अगर आप प्रइवेट या सरकारी नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ई-नामांकन (e-Nomination) फाइल करना क्यों जरूरी है? ई-नामांकन आपके परिवार को 7 लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा देता है। ईपीएफओ के सदस्य की मृत्यू होने पर पीएफ, पेंशन और बीमा लाभ आसानी से प्राप्त करने के लिए ई-नामांकन आवश्यक है। यह नामिनी को ऑनलाइन क्लेम करने की सुविधा देता है।

नॉमिनी का नाम अपने पीएफ खाते से ऐड नहीं किया तो होगा नुकसान

अगर आपने नॉमिनी का नाम अपने पीएफ खाते से ऐड नहीं किया तो आपके परिवार को 7 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है। क्योंकि ईपीएफओ सदस्य की मृत्यु के बाद बीमा की रकम का भुगतान होता है। अगर सेवा के दौरान ईपीएफ कर्मचारी की मृत्यु होने पर नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी बीमा के लिए क्लेम कर सकता है। इस स्कीम के तहत न्यूनमत बीमा शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है लाभ राशि ढाई लाख रुपये है। वहीं, बीमा की अधिकतम रकम 7 लाख रुपये है।

समझें IPO का पूरा गणित, ऐसे कर सकते हैं निवेश, बस ध्यान रखें ये 7 बातें!

aajtak.in

वर्ष 2021 को अगर IPO का साल कहें तो कुछ गलत नहीं होगा. अभी तक मार्केट में करीब 40 से ज्यादा नए IPO लॉन्च हो चुके है, और एक बड़ी लंबी लाइन बाकी है. हालत ये है कि पिछले कुछ हफ्तों में 4 IPO तक एक साथ लॉन्च हुए. अब ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि इनमें निवेश कैसे करें, क्या होता है IPO का गणित, तो बस इसके लिए आपको जाननी है ये 7 बातें.
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IPO असल में क्या है?

सबसे पहले आपको ये जानना होगा कि IPO होता क्या है? देश में कई प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें कई कंपनियां परिवार या कुछ शेयर होल्डर आपस में मिलकर चलाते हैं. जब इन कंपनियों को पूंजी की जरूरत होती है तो ये खुद को शेयर बाजार में लिस्ट कराती हैं और इसका सबसे कारगर तरीका है IPO यानी Initial Public Offer जारी करना.
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IPO में आम जनता बनती है मालिक

शेयर मार्केट में लिस्ट होने के लिए प्राइवेट कंपनी जो IPO लाती है, असल में वो बड़ी संख्या में आम लोगों, निवेशकों और अन्य को कंपनी के शेयर अलॉट करती है. अगर आसान भाषा में समझें तो अब उस कंपनी का मालिक सिर्फ उसे चलाने वाला परिवार या शेयर होल्डर नहीं होते बल्कि वो सब होते हैं जिनको IPO में शेयर अलॉट होता है.
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IPO में अलॉट हुए शेयर की खरीद-फरोख्त

IPO में जो शेयर अलॉट होते हैं, वो आमतौर पर शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है BSE या NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं. जहां लोग इन शेयरों की आराम से खरीद बिक्री कर सकते हैं. अब समझते हैं कि IPO लाया कैसे जाता है और किसी निवेशक के हितों की सुरक्षा होती है.
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ऐसे लाती है कोई कंपनी IPO

कोई कंपनी अगर IPO लाने का निर्णय करती है तो उसे मार्केट रेग्युलेटर SEBI के नियमों का पालन करना होता है. इन सब नियमों पर खरा उतरने के लिए कंपनी एक मर्चेंट बैंकर नियुक्त करती है, ये बैंकर सेबी में रजिस्टर्ड होता है और वही IPO से जुड़े सारे कंप्लायंस पूरे करके फिर IPO के लिए आवेदन करता है.
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क्या होता है DRHP

जब कोई कंपनी IPO लाती है तो वो सेबी के पास आवेदन करते समय कुछ दस्तावेज जमा कराती है. इसे लोग Draft Red Herring Prospectus (DRHP) नाम से भी जानते हैं. किसी भी कंपनी के IPO का DRHP शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है असल में उस कंपनी, उसके शेयरधारक, उसकी वित्तीय हालत, कंपनी के कामकाज, उसके कानूनी पचड़ों, उस पर कर्ज, IPO से मिलने वाले पैसे के यूज, उससे जुड़े जोखिम वगैरह की जानकारी देता है. सेबी इसका असेसमेंट करती है और अगर सब सही लगता है तभी कंपनी को IPO लाने की अनुमति मिलती है.
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अनुमति मिलने के बाद IPO में आती हैं बोलियां

सेबी से IPO लाने की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी अपने शेयरों के लिए बोलियां मंगवाती है. इसमें अलग-अलग तरह के निवेशकों जैसे कि रिटेल, इन्स्टीट्यूशनल के लिए अलग-अलग शेयर रिजर्व रखे जाते हैं. आम तौर पर किसी भी कंपनी का IPO तीन दिन के लिए खुलता है. अब समझते हैं कि IPO में निवेश कैसे कर सकते हैं.
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IPO में निवेश के लिए चाहिए Demat Account

किसी निवेशक को अगर IPO में निवेश करना है तो सबसे पहले उसके पास एक Demat Account होना चाहिए. Demat Account आप किसी भी ब्रोकिंग फर्म से खोल सकते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स की राय है कि हमेशा Demat Account एक जानी-मानी ब्रोकिंग फर्म से खोलना चाहिए. अब लोगों को शेयर अलॉटमेंट पेपर फॉर्म में नहीं बल्कि Demat फॉर्म में होता है, इसलिए IPO में निवेश के लिए Demat Account होना अनिवार्य है. Demat Account में ही आपके शेयर अलॉट होते हैं.
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पेमेंट करना होता है डिजिटल

IPO में निवेश करने के लिए अब आप कोई चेक या कैश पेमेंट नहीं कर सकते हैं. आपके Demat Account से एक खाता लिंक होता है. इसी खाते से आपके IPO के सारे लेनदेन होते हैं. जब तक आपको शेयर अलॉट नहीं हो जाते तब तक खाते में उतनी रकम ब्लॉक रहती है. हर IPO के लिए कंपनी शेयर का एक इश्यू प्राइस और लॉट तय करती है. एक रिटेल इन्वेस्टर एक बार में 2 लाख तक का निवेश ही IPO में कर सकता है.
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ऐसे होते हैं शेयर अलॉट

अब अगर आपने IPO में निवेश कर दिया है तो शेयर का अलॉटमेंट IPO बंद होने के बाद होता है. IPO बंद होने के बाद सभी बिड्स का असेसमेंट होता है और अगर कोई बिड अवैध होती है तो शेयर अलॉट नहीं होता. अगर किसी IPO को कुल जारी शेयर के मुकाबले कम शेयरों या उतने ही शेयरों की बोली मिलती है तो सभी इन्वेस्टर को उनकी बोली के मुताबिक शेयर अलॉट हो जाते हैं. वहीं जब कोई IPO ओवर सब्सक्राइब्ड होता है तो शेयरों का अलॉटमेंट प्रो-राटा बेस पर होता है. ये आपकी बोली से कम भी हो सकते हैं.
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आज इतना क्यों उछला शेयर बाजार? जानिए मुख्य कारण और समझें क्या होगा आगे

मंगलवार को सेंसेक्स पूरे एक हफ्ते के प्राइस को टेकओवर कर लिया.

मंगलवार को सेंसेक्स पूरे एक हफ्ते के प्राइस को टेकओवर कर लिया.

मंगलवार को सेंसेक्स पूरे एक हफ्ते के प्राइस को टेकओवर कर लिया, जिसमें कल की 861 अंकों की बड़ी गिरावट भी शामिल थी. एक्सपर्ट मानते हैं कि फिलहाल बुल्स पावर में हैं और बाजार आने वाले समय में और ऊपर जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : August 30, 2022, 19:07 IST

हाइलाइट्स

शेयर बाजार का आज का सेशन इस महीने (अगस्त) का आखिरी ट्रेडिंग सेशन था.
आज की तेजी के पीछे शॉर्ट-कवरिंग और वेल्यू-बाइंग (खरीदारी) दोनों शामिल रहे.
आने वाले दिनों में भी बाजार के आउटपरफॉर्म करते रहने की संभावनाएं हैं.

नई दिल्ली. आज शेयर बाजार ने लम्बी छलांग लगाई और बीएसई सेंसेक्स 1,564 अंक यानी 2.70 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ. निफ्टी 50 में 2.58 फीसदी, निफ्टी बैंक में 3.29 फीसदी, और निफ्टी आईटी में 2.63 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली. कल की बात करें तो बाजार बड़ी गैपडाउन ओपनिंग के साथ खुला और बंद होने तक उस गिरावट को रिकवर नहीं कर पाया था.

मंगलवार को सेंसेक्स पूरे एक हफ्ते के प्राइस को टेकओवर कर लिया, जिसमें कल की 861 अंकों की बड़ी गिरावट भी शामिल थी. कुल मिलाकर पूरा लॉस एक ही दिन में रिकवर कर लिया. आज का सेशन इस महीने (अगस्त) का आखिरी ट्रेडिंग सेशन था. कल, बुधवार को, शेयर बाजार बंद रहेगा. एक्सपर्ट कहते हैं कि इनके पीछे 2 मुख्य कारण हो सकते हैं. पहला तो शॉर्ट-कवरिंग (सेलिंग की पॉजिशन काटना) और दूसरा गिरावट के बाद वेल्यू-बाइंग (खरीदारी). आने वाले दिनों में भी बाजार के आउटपरफॉर्म करने की संभावनाएं हैं.

बाकी देशों से बेहतर कर रहा है भारत
मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक, आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड के सीईओ ए बालासुब्रमण्यम ने कहा, “भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के बाकी हिस्सों से बेहतर कर रहा है, जैसे सुधारों पर ध्यान शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है केंद्रित करना, डायरेक्ट टैक्स क्लेक्शन में सुधार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश और यह सुनिश्चित करना कि सामाजिक लाभ उन लोगों को मिले, जिन्हें इसकी आवश्यकता है.”

FIIs की चिंता किए बगैर उछला बाजार
आज की गैपअप ओपनिंग की बात करें तो यह बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बाद में बाजार ने गति पकड़ी और एक सप्ताह के शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है हाई के पास पहुंच गया. यह बात अलग है कि पिछले कुछ सेशन्स में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला है. हालांकि, इसके उलट DIIs ने भारतीय बाजारों में पैसा डाला है. कच्चे तेल के भाव भी बढ़े हैं. ब्रॉडर मार्केट भी बेंचमार्क इंडेक्सेज के साथ-साथ बढ़े, जैसे कि निफ्टी मिडकैप में भी 2 फीसदी की रैली देखी गई और स्मालकैप 100 इंडेक्स 1.3 फीसदी उछला.

सभी सेक्टरों में देखी गई रैली
मंगलवार की शानदार रैली में हर सेक्टर ने हिस्सा लिया, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 3.5 फीसदी की तेजी के साथ सबसे ज्यादा बढ़त बनाकर उभरा. बैंक और वित्तीय सेवाओं में प्रत्येक में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि आईटी और ऑटो सूचकांकों में 2.6 प्रतिशत और एफएमसीजी में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

सबसे अहम कारण: मजबूत Q1 जीडीपी डेटा की उम्मीदें शेयर बाज़ार क्या है एवं क्यों आवश्यक है
चूंकि अब आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह खुल चुकी हैं और घरेलू मांग मजबूत हो रही है तो समझा जा रहा है कि इस वित्त वर्ष की जून तिमाही में डबल-डिजिट ग्रोथ हो सकती है. इसी उम्मीद के साथ आज बाजार में अच्छी-खासी खरीदारी देखने को मिली हो सकती है. बार्कले का अनुमान कहता है कि भारत वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में 16 फीसदी की दर से बढ़ा है.

ऑटो सेक्टर का तेज घूमता पहिया
ऑटो सेक्टर के मासिक बिक्री के नंबर आने वाले हैं. उम्मीद है इसी हफ्ते के अंत तक ये नंबर हमारे सामने होंगे. इससे पहले इस सेक्टर के शेयरों में तेजी आई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैरिंग ट्रैक्टर की बिक्री में इजाफा हुआ है, ऐसे में अच्छे नंबरों की उम्मीद है. आज ट्यूब इन्वेस्टमेंट ऑफ इंडिया, अशोक लेलेंड, टाटा मोटर्स, टीवीएस मोटर्स, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत फोर्ज, आयशर मोटर्स, बॉश, और बालकृष्ण इंडस्ट्री में 2-5 फीसदी तक का उछाल आया है.

यूरोपियन बाजारों का पॉजिटिव मूड
कल अमेरिकी बाजार हालांकि गिरे थे, लेकिन यूरोप के बाजारों में दिखने वाली मजबूती भी आज की रैली का एक कारण बनी. जर्मनी का DAX 1.9 फीसदी ऊपर था, फ्रांस का CAS एक फीसदी बढ़ा, और ब्रिटेन का FTSE में 0.3 फीसदी की हल्की बढ़त देखने को मिली. पिछले सेशन में फेड चीफ जेरोम पॉवेल के कमेंट ने बाजार का मूड खराब कर दिया था, जिसके चलते विश्व स्तर पर बाजारों में गिरावट दिखी.
एशिया में, जापान के Nikkei और साउथ कोरिया के Kospi में भी एक फीसदी से अधिक की बढ़त रही. चीन के Shanghai Composite और हॉन्ग-कॉन्ग के Hang Seng थोड़े नेगेटिव थे.

टेक्निकल व्यू और इंडिया विक्स (VIX)
टेक्निकल के आधार पर कहा जाए तो निफ्टी50 ने आज गैपअप ओपनिंग के साथ अपनी रैली को जारी रखा और पूरे दिन में एक बड़ी बुलिश कैंडल दिखाई. इस कैंडल का मतलब है कि बुल्स इस समय पावर में हैं. इंडेक्स ने पिछले दिन के निचले स्तर को भी रिस्पेक्ट किया, जोकि एक और पॉजिटिव फैक्टर है. इस तरह, यदि इंडेक्स इसी ट्रेंड में चलता हुआ 18,000 के स्तर को पार कर लेता है तो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बाजार जल्द ही 18,114 और 18,350 का स्तर भी छू सकता है.

विक्स अथवा वोलैटिलिटी की बात करें तो यह भी थोड़ी शांत हुई है और यह 6 फीसदी गिरकर 18.7 पर आ गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया विक्स का नीचे आना बुल बाजार के लिए एक अच्छा संकेत माना जाता है. यदि विक्स 18 से भी नीचे जाती है तो बाजार में एक अच्छी स्थिरता देखने को मिलेगी.

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