ट्रेडर्स के लिए शुरुआती गाइड

Stock Rating के ये होते हैं मतलब

Stock Rating के ये होते हैं मतलब
अभी हमने ऊपर रोड का उदाहरण लिये तो इसी की बात करते हैं इसमें हमें देखना होगा कोई न्युज से या बजेट की घोषणा से कौन-सा Stock Rating के ये होते हैं मतलब सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हैं। तो इस केस में हम Cement Sector पकड़ते हैं तो इस सेक्टर में कौनसा Share Good Perform करेगा यह कैसे जानें। तो चलिये इसके लिये मैं आपको Screener.in इस वेबसाईट के रेफरेंस से आपको बताता हु की कैसे देखना हैं।

पहला पैमाना-

Stock- स्टाॅक

क्या होता है स्टॉक?
Stock: स्टॉक (जिसे इक्विटी के नाम से भी जाना जाता है) एक सिक्योरिटी है, जो किसी कंपनी के एक अंश के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती है। यह स्टॉक के मालिक को कंपनी के एसेट और जितना स्टॉक उनके पास है, उसके लाभ के बराबर के अनुपात का अधिकार देता है। स्टॉक के यूनिट को ‘शेयर' कहा जाता है। स्टाॅक की खरीद और बिक्री मुख्य रूप से स्टॉक एक्सचेंजो पर की जाती है, हांलाकि इसकी बिक्री निजी तौर पर भी की जाती है और ये कई इंडीविजुअल निवेशकों के पोर्टफोलियो की बुनियाद होते हैं। इन ट्रांजेक्शन को सरकारी नियमों का पालन करना पड़ता है जिनका प्रयोजन निवेशकों को धोखाधड़ी वाले प्रचलनों से बचाना होता है। पारंपरिक रूप से, दीर्घकालिक अवधि में उनका प्रदर्शन अधिकांश अन्य निवेशों की तुलना में बेहतर रहा है। इन निवेशों को अधिकांश ऑनलाइन स्टॉक ब्रोकरों से खरीद जा सकता है।

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अमित कुमार दुबे

अधिकतर रिटेलर (Retailer) या फिर कहें आम आदमी, अक्सर दूसरे के कहने पर शेयर बाजारों (Stock Rating के ये होते हैं मतलब Share Market) में निवेश करते हैं, उन्हें कोई कह देता है कि ये Stock अच्छा रिटर्न (Return) दे सकता है और फिर उसमें वे अपनी गाढ़ी कमाई लगा देते हैं. लेकिन क्या आपने ये कभी जानने की कोशिश की है कि Stock Rating के ये होते हैं मतलब जिस कंपनी के स्टॉक में आप निवेश कर रहे हैं, उसका कारोबार कैसा है? (Photo: Getty Images)

Stock Selection Process

दरअलस, रिटेल निवेशक (Retail Investor) भविष्य को ध्यान में रखकर शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करते हैं, क्योंकि उनका नजरिया लॉन्ग टर्म (Long Term) रहता है. लेकिन इसके बावजूद अधिकतर रिटेल निवेशक वर्षों तक निवेशित रहने के बाद भी अच्छा मुनाफा नहीं कमा पाते हैं. इसका एक ही कारण स्टॉक (Stock Selection) का सही से चयन नहीं कर पाना है. (Photo: Getty Images)

फंडामेंटल एनालिसिस:

Stock Analysis करते समय फंडामेंटल एनालिसिस के द्वारा शेयर की सही कीमत पता करने की कोशिश की जाती है शेयर की कीमत पता करने के लिए, कम्पनी वर्तमान में जो कारोबार रही है। वह अगले दो, पांच या दस सालों में कितना बढ़ सकता है।
मान लीजिये, आज कम्पनी को 500 करोड़ का प्रॉफिट हो रहा है, तो अगले साल कितना प्रॉफिट हो सकता है। इस तरह हम जितने साल के लिए कम्पनी में इन्वेस्ट करना चाहते है, उतने साल तक का अनुमान Fundamental Analysis में लगाया जाता है।


फंडामेंटल एनालिसिस में ये भी देखा है कि अगले दो , पांच या दस साल में कंपनी के कैशफ्लो कैसे रह सकते है। कैशफ्लो की आज की तरीख में नेट प्रजेंट वैल्यू निकलने की कोशिश की जाती है। ऐसी आधार पर कम्पनी के प्रत्येक शेयर की प्रजेंट वैल्यु निकली जाती है।
दूसरा तरीका है कि कम्पनी की इंट्रिनसिक वैल्यू क्या है ? यानि की कम्पनी की सभी सम्पत्तियो तथा देनदारियों को निकालकर कम्पनी की नेट वैल्यू निकली जाती है।
कई बार लोग stock Analysis करते समय ये भी देखते है कि कम्पनी की डिविडेंट पॉलिसी क्या है ? यदि कम्पनी साल दर साल अच्छा डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब कम्पनी कैश जेनरेशन भी कर रही है तथा Investor friendly भी है। ये सब मुददे स्टॉक एनालिसिस में देखे जाते है। उपर्यक्त सभी तरीको के द्वारा आप यह पता लगा सकते है कि कोई शेयर फंडामेंटली अच्छा है या बेकार।
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टेक्नीकल Stock Rating के ये होते हैं मतलब एनालिसिस:

इसमें शेयर का चार्ट देखकर भविष्य बताने की कोशिश की जाती है। पुराने डेटा के आधार पर अब तक शेयर ने कितना वॉल्यूम किया तथा किस तरह का प्राइस एक्शन शेयर ने किया। शेयर कब कितना ऊपर - नीचे हुआ तथा कितन कितने वॉल्यूम पर हुआ , कितने समय में हुआ।
इस तरह Technical Analysis चार्ट पर पुराने डेटा को देखकर Stock Analysis करके किसी शेयर के भविष्य में होने वाले उतर -चढ़ाव को जानने की कोशिश को कहते है।
बहुत से लोग टेक्निकल एनालिसिस को शेयर का पोस्टमार्टम कहते है, डायग्नोसिस नहीं क्योंकि इसमें पुराने डेटा से भविष्य का अनुमान लगते है। ये भी एक stock analysis का तरीका है इसलिए लोग ऐसा करते है अतः ये गलत नहीं है।

इसमें इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि कम्पनी फंडामेंटल कैसे है, कम्पनी अच्छी है या बुरी क्योंकि इसमें सिर्फ price और volume एक्शन देखा जाता है technical analysis उन लोगों के लिए अच्छा है जो ट्रेडर हैं, intraday या short term trade करते है।
टेक्निकल एनालिसिस उन लोगो के लिए भी अच्छा है ,जो किसी शेयर Stock Rating के ये होते हैं मतलब में लम्बे समय तक निवेशित रहना चाहते है ,वो चार्ट के आधार पर उस Stock Rating के ये होते हैं मतलब लेवल का पता लगा सकते है जिस पर शेयर में लम्बे समय के लिए निवेश करना फायदे का सौदा हो सकता है इन्वेस्टर के लिए टेक्निकल एनालिसिस के द्वारा किसी शेयर में एंट्री तथा एग्जिट के थोड़े संकेत मिलते है।ट्रेडर के लिए technical analysis सीखना आवश्यक है क्योंकि ट्रेडर को ट्रेड करने से पहले ही तय करना होता है, कि शेयर किस कीमत पर खरीदना तथा बेचना है। इसके लिए ट्रेडर को चार्ट पढ़ना आना चाहिए ,ये बात भी सही है कि जिन Stock Rating के ये होते हैं मतलब लोगों को चार्ट पढ़ना आता है वो शेयर बाजार में काफी पैसे कमाते है।
टेक्निकल एनालिसिस में stop loss लगाना बहुत जरूरी होता है। कई बार यह ट्रिगर भी हो जाता है ,स्टॉप लॉस ट्रेडर को बड़े नुकसान से बचता है।इसमें एक बात साफ होती है कि आपको शेयर एक निश्चित कीमत पर खरीदना होता है तथा निश्चित टार्गेट के लिए खरीदना होता है, आप टार्गेट को revise कर सकते है टार्गेट के साथ-साथ स्टॉप लॉस को भी रीवाइज करना चाहिए।

क़्वालीटेटिव एनालिसिस:

Stock analysis करने का तीसरा तरीका qualitative analysis है इसमें ये देखा जाता है कि जो लोग चला रहे हैं ( कम्पनी के प्रमोटर) उनका बैकग्राउंड कैसा है ? मान लेते हैं कि टाटा, अंबानी, वाडिया ये लोग बिज़नेस चला रहे है इन लोगों ने बड़ा एम्पायर खड़ा किया है।

आपको ये जानने का प्रयास करना चाहिए कि इनका कम्पनी खड़ी करने का पुराना रिकॉर्ड कैसा है ? गवर्नेंस तथा लेन -देन को लेकर कम्पनी के मेनेजमेंट का रिकॉर्ड कैसा है ? कोई गलत काम तो नहीं किये। मेनेजमैंट के खिलाफ रेगुलेटर के कोई एक्शन तो नहीं हुए।

यह भी जरूर जानना चाहिए कि कम्पनी का बिज़नेस मॉडल कैसा है ? क्या उसमें कुछ बेरियर ? कॉम्पिटिशन कितना आ सकता है ? उस बिज़नेस में रेवेन्यू विसिबिल्टी कैसी रह सकती है ? ये भी देखना चाहिए कि इसकी इंडस्ट्री कितना ग्रोथ कर रही है क्योंकि यदि इसकी इंडस्ट्री में ही ग्रोथ नहीं होगी, तो ये कम्पनी भी कहाँ ग्रोथ कर पायेगी ? ये कुछ फैक्टर है जिनसे qualitative analysis किया जाता है।

शेयर खरीदने से Stock Rating के ये होते हैं मतलब पहले पीई रेशियो जरूर देख लें, ये है वजह

शेयर खरीदने से पहले पीई रेशियो जरूर देख लें, ये है वजह

क्या है पीई रेशियो? ज्यादातर निवेशक किसी शेयर में पैसा लगाने से पहले उसका पीई रेशियो क्यों देखते हैं? कैसे निकलता है शेयर का पीई रेशियो? हमने इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश Stock Rating के ये होते हैं मतलब की है. इससे आपको निवेश के लिए सही शेयर का चुनाव करने में मदद मिलेगी.

क्या है पीई रेशियो?
किसी कंपनी के शेयर की वैल्यू यानी यह पता लगाने के लिए कि वह सस्ता है या महंगा सबसे ज्यादा पीई रेशियों के पैमाने का इस्तेमाल होता है. इसे शेयर की कीमत और शेयर से आय का अनुपात कहा जा सकता है. शेयर से आय को शेयर बाजार की शब्दावली में ईपीएस कहते हैं. इसका मतलब अर्निंग प्रति शेयर है. किसी कंपनी के मुनाफे में उसके कुल शेयरों की संख्या से भाग देने पर ईपीएस निकलता है. इसके Stock Rating के ये होते हैं मतलब बाद शेयर बाजार में शेयर की कीमत में ईपीएस से भाग देने पर पीई रेशियो निकलता है.

FAQ

Q: Long term Investment वाली Stocks का मार्केट कैपिटलाइजेशन कैसा होना चाहिये?

Ans: जितना जादा मार्केट कैपिटलाइजेशन उतनी बडी कंपनी

Q: EPS का Long Form क्या होता हैं?

Ans: EPS का मतलब Earning Per Share होता हैं

Q: Stock Market में ROE का मतलब क्या होता हैं?

Ans: ROE का मतलब Return On Stock Rating के ये होते हैं मतलब Equity होता हैंं

Q: Stock Selection के लिये कौन से Parameters देखें?

Ans: Market Capitalisation, Salary Growth, Free Cash Flow, DOE, Return on Equity, EPS यह पॅरामिटर हमें देखने चाहिये।

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