विदेशी मुद्रा व्यापार का परिचय

सौदा दर्ज करने के नियम

सौदा दर्ज करने के नियम
थोक और ब्लॉक सौदे किसी विशेष स्टॉक में ब्याज के निर्माण या कम होने का संकेत हो सकता है। हालांकि, इन संकेतों को सावधानीपूर्वक संसाधित करने की आवश्यकता होती है और ट्रेडिंग निर्णय पर पहुंचने के लिए अन्य रुझानों और संकेतकों के साथ मिलान किया जाना चाहिए।थोक आर्डर के केवल निष्पादन का मतलब यह नहीं है कि एक विशेष स्टॉक के थोक व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, किसी विशेष दिशा में बार-बार थोक लेनदेन – चाहे यह खरीद हो या बिक्री – थोक व्यापार की दिशा में स्टॉक में रुचि का संकेत हो सकता है।

ब्लॉक सौदे बनाम थोक सौदे: अंतर जानें

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शेयर बाजार एक ऐसा स्थान है जहां कई प्रतिभागियों द्वारा शेयर खरीदे जाते हैं और बेचे जाते हैं। अगर नामों की बात करें तो,खुदरा निवेशक के अलावा, निवेश बैंक, म्यूचुअल फंड, हेज फंड, पेंशन फंड, विदेशी संस्थागत निवेशक ( FIIs ), उच्च निवल मूल्य व्यक्तियों ( HNIs ), कंपनी प्रमोटर इत्यादि जैसे कुछ बड़े संस्थान आते हैं। ये संस्थागत निवेशक और उच्च निवल मूल्य व्यक्ति( HNIs ) की जेबें भरी होती हैं और इनके पास कंपनियों और बाजारों का विस्तृत ज्ञान होता है, जो खुदरा निवेशक के लिए हमेशा उपलब्ध नहीं होते हैं। नतीजतन, इन बड़े निवेशकों के ट्रेडिंग पैटर्न खुदरा निवेशकों से अलग हैं। बड़े और संस्थागत निवेशकों द्वारा दर्ज किए गए दो सामान्य प्रकार के लेनदेन ब्लॉक सौदे और थोक सौदे हैं। हालांकि ये दोनों नाम समान लगते हैं, लेकिन इनकी प्रकृति वास्तव में एक दूसरे से बहुत अलग हैं।

इन हालातों में रद्द हो सकती है जमीन की रजिस्ट्री, ध्यान रखें ये 9 बातें

  • Devendra Sharma
  • Updated On - November 11, 2021 / 09:35 AM IST

इन हालातों में रद्द हो सकती है जमीन की रजिस्ट्री, ध्यान रखें ये 9 बातें

अगर आपत्तियां फर्जी हैं और दस्तावेजों में सबकुछ सही पाया जाता है तो खरीदार का नाम राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज कर दिया जाता है. PC: Pixabay

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने के बाद आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि काम पूरा हो गया और हम उस संपत्ति के मालिक बन गए. अगर आप भी कोई प्रॉपर्टी खरीदने के बाद ऐसा ही सोच रहे हैं तो आपकी ये सोच पूरी तरह से गलत है. रजिस्ट्री कराने के बाद एक निश्चित अवधि तक इस रजिस्ट्री के विरोध में आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं. आपत्ति दर्ज कराने वालों में विक्रेता के परिजन, रिश्तेदार या हिस्सेदार शाामिल हो सकते हैं.

बिक्री समझौता टूटने पर आप उठा सकते हैं ये कदम, खटखटा सकते हैं अदालत का दरवाजा

एक बिक्री समझौता ग्राहक और प्रॉपर्टी बेचने वाले के बीच होता है। किसी अन्य कॉन्ट्रैक्ट की तरह इसमें भी गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए यह विक्रेता और खरीददार दोनों के लिेए जरूरी है कि वह अॉफर मंजूर करने से पहले सोच-विचार कर लें। अगर एक पार्टी अग्रीमेंट का पालन नहीं करती तो आपके अधिकार क्या होंगे, आज हम इसी पर बात करेंगे।

बेचने वाले के नजरिए से: अगर अग्रीमेंट का उल्लंघन होता है तो कई एेसे तरीके हैं, जिस पर आप अमल कर सकते हैं। कोई फैसला करने से पहले बिक्री समझौते को देख लें कि उसके क्लॉज में क्या-क्या लिखा है। ये बातें जरूर चेक करें:

*क्या कोई ऐसा क्लॉज है, जिसमें लिखा है कि संपत्ति के शीर्षक से संतुष्ट होने के बाद ही खरीददार बाकी शेष राशि का भुगतान करेगा?

*क्या कोई क्लॉज है कि आप खरीददार को कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने और नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी नोटिस भेज सकते हैं?

रियल एस्टेट अपडेट के साथ बने रहें

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बगैर अनुमति बेच दी थी पट्‌टे की जमीन, सौदा रद्द, जमीन भी सरकारी घोषित

खेती के लिए दिए पट्‌टे को बगैर अनुमति दूसरे को बेचने के मामले में राजस्व न्यायालय (एडीएम) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सोनकच्छ के गांव डेहरिया पेठ की आधा हेक्टेयर जमीन का रजिस्टर्ड विक्रय पत्र रद्द कर दिया गया। आदेश में कहा कि मप्र राजस्व संहिता 1959 के विपरीत बिना अंतरण की अनुमति लिए यह बिक्री की गई जो पट्‌टा शर्त का उल्लंघन है। इस सौदे को रद्द कर पट्‌टा भी निरस्त कर दिया गया है और जमीन को सरकारी घोषित की है। तहसीलदार को कब्जा लेने के आदेश भी दिए।

खरीदार और विक्रेता के तर्क
सुनवाई में खरीदार पक्ष का कहना था कि संहिता के अनुसार 10 साल के लिए किसी भी किसान को जमीन का पट्‌टा दिया जाता है तो उसके 10 वर्ष बाद भूमि स्वामी को जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति की जरूरत नहीं होती। विक्रेता सौदा दर्ज करने के नियम को रजिस्ट्री की जानकारी होने के बाद भी उसने आज तक आपत्ति या रजिस्ट्री निरस्त करने के लिए वाद प्रस्तुत नहीं किया है, न ही कोई कथन दर्ज कराए। इसलिए खरीदार को जारी सौदा दर्ज करने के नियम सूचना पत्र रद्द कर उसे भूमि स्वामी माना जाए।

Ghaziabad News: सरकारी पट्‌टे की जमीन को अपना बताकर 2.5 करोड़ में सौदा किया, 13 लाख हड़पे. ऐसे खुला मामला

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद (Ghaziabad) से धोखाधड़ी का अलग ही मामला सामने आ रहा है। विजयनगर के कैलाश नगर में रहने वाले एक व्यक्ति ने मसूरी में रहने वाले 2 भाइयों पर सरकारी जमीन को 2.50 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा कर बयाने के तौर पर 13 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाते हुए मसूरी थाने में केस दर्ज कराया है।

नईमुद्दीन का कहना है कि जमीन का लिखित एग्रीमेंट होने पर उन्होंने 13 लाख रुपये बयाना दे दिया था। बयाना होने के बाद उन्होंने जमीन के बारे में जानकारी की तो पता चला कि यह सरकारी पट्टे की जमीन है। नईमुद्दीन का कहना है कि इस मामले सौदा दर्ज करने के नियम में फंसने से बचने के लिए उन्होंने अब्दुल गनी से रुपये वापस मांगे और जमीन न खरीदने की बात कही।

इस बात पर अब्दुल ने कहा कि वह रुपये तो खर्च हो गए हैं। किसी और को जमीन बेचने के बाद रुपये लौटाने को कहने लगा। लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने रुपये नहीं लौटाए। आरोप है कि फिर से तगादा करने पर दोनों भाई अभद्रता करने लगे और जान से मारने की धमकी देने लगे।

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