निवेश योजना

अपने दलाल दर

अपने दलाल दर
समस्या को घटाने की बजाय प्राधिकरण ने बढ़ाया
धीरज सिंह की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती है। किसानों और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के बीच लंबे कानूनी विवाद के बाद साल 2011 में फैसला आया था। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित स्थानीय किसानों को 64.7% अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा और 6% की बजाय 10% आबादी भूखंड आवंटित किए जाएंगे। धीरज सिंह कहते हैं, "हमें अदालत के आदेश पर 4% अतिरिक्त आबादी का भूखंड 13 सितंबर 2017 को पड़ोसी गांव घरबरा की जमीन पर आवंटित कर दिया गया। यहां भी प्राधिकरण ने हमें परेशान करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। हमारी पुराणी परेशानी का समाधान तो किया नहीं ऊपर से दूसरी परेशानी हमें अपने दलाल दर दे दी है। यह भूखंड जिस जगह पर दिया गया है वहां एयरविल ऑर्गेनिक बिल्डर पहले से पजेशन लेकर बैठा हुआ है।

टोंटो में पुलिस व नक्सलियों के बीच घंटों तक जारी रही मुठभेड़

क्या रियल एस्टेट शेयर बाजार से बेहतर निवेश है?

हम 28 साल शेष के साथ उप -3% बंधक के साथ एक नकदी-प्रवाह वाली किराये की संपत्ति के मालिक हैं। पर पोर्टफोलियो रेस्क्यू का 18 अगस्त का एपिसोड, बैरी ने कहा “रियल एस्टेट कमोबेश शून्य मुद्रास्फीति का शुद्ध रिटर्न देता है।” हालांकि, क्या यह कथन मोर्टगेज द्वारा प्रदान किए गए उत्तोलन को ध्यान में रखता है? स्टॉक और रियल एस्टेट के बीच वापसी की तुलना स्टॉक के पक्ष में प्रतीत होती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये तुलना कभी बंधक उत्तोलन को ध्यान में रखती है या नहीं। साथ ही, एक कारक एक बंधक दर कैसे करता है जो वर्तमान मुद्रास्फीति से कम कैलकुलेशन में है? 20 साल के समय क्षितिज पर, क्या वास्तव में सैद्धांतिक रूप से संपत्ति को बेचना और आय को स्टॉक/बॉन्ड के कुछ संयोजन में निवेश करना बेहतर होगा? -निक

रॉबर्ट शिलर श्रमसाध्य रूप से 1890 तक अमेरिकी घरेलू कीमतों का एक सूचकांक बनाया।

Jharkhand Politics: झारखंड के अफसरों के नाम पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का खुला पत्र

Jharkhand News भाजपा नेता व पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के अफसरों को कहा है कि इतिहास का पन्ना पलटकर देखें। दबाव में गलत काम करने का परिणाम बुरा होता है। बाबूलाल मरांडी ने अफसरों के नाम एक पत्र जारी कर यह बात कही है।

रांची, राज्य ब्यूरो। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के अफसरों को सुझाव देते हुए खुला पत्र जारी किया है। उनके मुताबिक दबाव में गलत काम अधिकारियों को नहीं करना चाहिए। इसका परिणाम बुरा होता है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल का एक अनुभव शेयर करते कहा कि तब उग्रवादियों का उत्पात चरम पर था। योजना ज्यादा से ज्यादा उग्रवादियों, उनके सहयोगियों को मुख्यधारा में वापस लाने की थी। आदिवासी बहुल एक जिले में कुछ उग्रवादियों को संसाधन देने वालों के पीछे पुलिस हाथ धोकर पड़ी हुई थी।

मैंने अपनी बात तुरंत वापस ले ली.

वहां के एक सीनियर पदाधिकारी को बुलाकर कर कहा कि उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहता हूं। थोड़ा रहम करिए उनपर। वे अधिकारी रो पड़े और कहा कि सर ये लोग भारी बदमाश हैं। मुझसे तो यह नहीं होगा। आप चाहें तो मुझे वहां से हटा दीजिए। मैंने तुरंत अपनी बात वापस ली और उन्हें कहा कि बेहिचक अपनी कार्रवाई जारी रखिए। आज भी उन्हें देखता हूं तो मुझे उनकी बात याद आ जाती है। उन्हें सम्मान से देखता हूं। संयोगवश वे अफसर भी आदिवासी समाज से ही थे। मैंने पद की गोपनीयता की शपथ ली थी, इसलिए उनका नाम उजागर नहीं करूंगा।

झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन में पीएम मोदी को लिखा पत्र

लालची अफसरों की कहानी सुन शर्म आती है.

ठीक इसके उलट कुछ नए अफसरों के भी कानून से अलग सत्ता के इशारे पर चंद पैसे और महत्वपूर्ण पद के लालच में करतूत सुनता हूं तो शर्म आती है और आश्चर्य भी होता है। सरकार के इशारे पर हर गलत काम करने वाले ऐसे कुछ अफसर आजकल परेशानी में अपने-अपने संपर्कों के जरिये मिलते हैं या अपने दलाल दर मिलने का प्रयास करते हैं। उन्हें अपनी करनी का भय है कि न जाने कब उनकी गर्दन दबोची जाए? ऐसे लोग अपनी सफाई देते जब बताते हैं कि उनसे दबाव देकर कैसे गलत करा लिया गया तो सुनकर हैरानी होती है।

कुड़मी समाज में शादी की अपनी अनोखी परंपरा है

धक्के खाते ग्रेटर नोएडा के किसान : चूहड़पुर के धीरज सिंह को 20 फुट गहरे गड्ढे में दिया आबादी का भूखंड,16 वर्षों से नहीं मिला कब्जा


Greater Noida : एक तरफ ग्रेटर नोएडा के किसान हैं, जो दशकों पहले विकास प्राधिकरण (Greater Noida Authority) को अपनी जमीन देकर अपने हकों के लिए दफ्तर-दफ्तर धक्के खा रहे हैं। दूसरी तरफ दलालों का एक अपने दलाल दर गैंग है, जो इन किसानों के हकों पर येन-केन-प्रकारेण कब्जा करके मालामाल हो रहा है। यह सारा खेल किसानों के 4%, 6% और 10% आबादी भूखंडों को लेकर खेला जा रहा है। हम ऐसे ही किसानों की 'व्यथा कथा' आपके सामने पेश कर रहे हैं, जो लंबे अरसे से प्राधिकरण अफसरों की उपेक्षा, मनमानी और भ्रष्टाचार के शिकार हैं। हमारी इस समाचार श्रृंखला में आज चूहड़पुर गांव के धीरज सिंह क दर्द आपके सामने रख रहे हैं।

16 साल से आबादी भूखंड पर कब्जा नहीं मिला
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के दायरे वाले चूहड़पुर गांव के निवासी धीरज सिंह पुत्र चंदन सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 से पहले उनकी 22,310 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया था। अधिग्रहीत भूमि के सापेक्ष किसानों को भविष्य का आबादी विस्तार करने के लिए 6% भूखंडों का आवंटन किया जाता है। हमें 1,340 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले आबादी भूखंड का आवंटन 25 जुलाई 2006 को किया गया, लेकिन आज तक इस भूखंड पर हमें कब्जा नहीं मिला है। यह बस कागजों पर हमारे नाम है। दरअसल, इस प्लॉट तक जाने का रास्ता ही उपलब्ध नहीं है। अब 16 साल बीत गए हैं और प्राधिकरण हमारे प्लॉट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं बना पाया है।

Sensex कब छुएगा 1 लाख का जादुई आंकड़ा? रिकॉर्ड हाई के बाद मन में आए हर सवाल का जानें जवाब

बाजार के विशेषज्ञों को उम्‍मीद है कि जल्‍द ही सेंसेक्‍स 1 लाख अंक के स्‍तर को पार कर जाएगा.

बाजार के विशेषज्ञों को उम्‍मीद है कि जल्‍द ही सेंसेक्‍स 1 लाख अंक के स्‍तर को पार कर जाएगा.

Sensex will hit 1-Lakh Magic Figure - सोमवार को सेंसेक्‍स ने 62,500 अंक का स्‍तर पार कर लिया. इसके बाद आपके मन में कई स . अधिक पढ़ें

  • News18 हिंदी
  • Last Updated : November 29, 2022, 09:55 IST
सेंसेक्‍स 10 साल में करीब चार गुना होकर 2 लाख अंक के स्‍तर पर प‍हुंच जाएगा.
2022 में हर उठापटक के बाद भी शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी शानदार रहा है.

मुंबई. सेंसेक्‍स सप्‍ताह के पहले दिन अपने दलाल दर यानी 28 नवंबर 2022 को अपने सर्वोच्‍च स्‍तर 62,504.80 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी तेजी के साथ बंद-बंद होते-होते 18,562.75 अंक पर पहुंच गया. पहली बार भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) इस स्‍तर पर बंद हुए हैं. शेयर बाजार के इस स्‍तर पर पहुंचने के बाद ज्‍यादातर लोगों के मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि सेंसेक्‍स 1,00,000 अंक के जादुई आंकड़े (Sensex will hit 1 lakh magic figure) को कब तक छू लेगा? लंबी अवधि के निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों ने इसको लेकर कैलकुलेशन व अनुमान लगाने भी शुरू कर दिए हैं.

गुजरात विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं की संख्‍या

पहली बार वोट करने वाला युवा भी बहुत उत्‍साहित नजर आता है। उनका मत प्रतिशत भी कम नहीं होता। लेकिन ये युवा किसको वोट करेगा ये प्रत्‍याशियों के लिए दुविधा वाला प्रश्‍न है। गुजरात विधानसभा चुनाव में 11 लाख से अधिक युवा ऐसे हैं, जो राज्‍य का भविष्य तय करने के लिए पहली बार वोट करेंगे।

राज्‍य विधानसभा की 182 सीटों में से 35 सीटें दक्षिण गुजरात में हैं। दक्षिण गुजरात के सात जिले सूरत, वलसाड़, नवसारी, भरूच, नर्मदा, तापी और डांग को मिलाकर 35 विधानसभा सीटों पर 2 लाख 33 हजार 142 युवा पहली बार मतदान के लिए पंजीकृत हैं। पहले चरण में होने वाले इस क्षेत्र के सूरत जिले में ही अन्य जिलों के मुकाबले सबसे अधिक 1 लाख 2 हजार पांच सौ छह फर्स्ट टाइम युवा वोटर के रूप में मतदान करेंगे।

रेटिंग: 4.54
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 508
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