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IPO क्या होता है?

IPO क्या होता है?
February 8, 2019

LIC IPO: पॉलिसीहोल्डर,स्टाफ और एजेंट के लिए क्या है खास ऑफर

LIC IPO: पॉलिसीहोल्डर,स्टाफ और एजेंट के लिए क्या है खास ऑफर

पूरी तरीके से सरकार की स्वामितव वाली इंशोरेंस कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी (LIC IPO का इंतजार निवेशक काफी दिनों से कर रहे हैं. इन्वेटर्स का ये इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है. कंपनी ने मार्केट रेगुलेटर के साथ ड्राफ्ट रेड हेररिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) 13 फरवरी IPO क्या होता है? को फाइल कर दिया. उम्मीद की जा रही है किसेबी इश्यू लाने के कंपनी को बहुत जल्द हरी झंडी दे देगी.

कुछ सोर्स से पता चलता है LIC का आईपीओ 10 मार्च को मार्केट में लॉन्च हो सकता है. LIC के शेयरों की लिस्टिंग मार्च के अंत तक हो जाने की उम्मीद है.

5% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

सरकार आईपीओ के माध्यम से LIC में अपनी 5% हिस्सेदारी बेचेगी. आईपीओ के बाद भी सरकार के पास कंपनी का 95% हिस्सा होगा. सरकार एलआईसी के आईपीओ में 31.6 करोड़ इक्विटी शेयर्स बेचकर 65,416 करोड़ जुटा सकती है. यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO होगा.

पॉलिसीहोल्डर को मिलेंगे ये फायदे

LIC की पहुंच देश के कोने-कोने तक है. ड्राफ्ट रेड हेररिंग प्रॉस्पेक्टस के हिसाब से देशभर में LIC के 29 करोड़ पॉलिसीहोल्डर हैं. LIC की एजेंट की संख्या करीब 13.5 लाख है. वित्त वर्ष 2021 में जारी किये गए इंडिविजुअल पॉलिसी के संदर्भ में एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी 74.6% है.

पॉलिसीहोल्डर की इतनी बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने कुल इश्यू का अधिकतम 10% हिस्सा अपने पॉलिसीहोल्डर के लिए रिजर्व किया है. 'पॉलिसीहोल्डर रिजर्वेशन पोर्शन' (Policyholder Reservation Portion) के तहत पॉलिसीहोल्डर्स के लिए इश्यू का 10% हिस्सा अलग रखा जाएगा. हालांकि अगर आप नॉन रेजिडेंशियल इंडियन (NRI) हैं तो आपको इस रिजर्वेशन पोर्शन का लाभ नहीं मिलेगा. NRI रिटेल हिस्से के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

ज्वाइंट पॉलिसी है तो क्या दानों को मिलेगा LIC IPO?

अगर आपने जॉइंट लाइफ पॉलिसी ली हुई है तो दोनों में से कोई एक आदमी ही 'पॉलिसीहोल्डर रिजर्वेशन पोर्शन' के तहत आईपीओ के लिए अप्लाई कर सकता है.

पॉलिसीहोल्डर को आईपीओ में डिस्काउंट भी दिया जाएगा. हालांकि इश्यू में पॉलिसीहोल्डर को कितना डिस्काउंट मिलेगा, इसपर सरकार ने अभी तक कोई औपचरिक घोषणा नहीं की है. हालांकि IPO क्या होता है? कुछ सोर्स से पता चलता है पॉलिसीहोल्डर को आईपीओ में 10% का डिस्काउंट दिया जाएगा. इस वजह से कई नए निवेशक पहली बार शेयर बाजार से जुड़ेंगे.

LIC IPO : देश के सबसे बड़े आईपीओ में क्या आपको निवेश करना चाहिए या नहीं?

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क्या स्टाफ और एजेंट को भी मिलेगा LIC IPO?

LIC ने अपने एजेंट और कर्मचारी के लिए भी इश्यू का 5% हिस्सा आरीक्षित किया है. ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, एक एलिजिबल पॉलिसीधारक को शेयर आवंटन का कुल मूल्य (छूट के बाद) ₹2 लाख से अधिक नहीं हो सकता है.

कौन-कौन पॉलिसी होंगे एलिजिबल?

सभी पॉलिसी जो मैच्योंरिटी, सरेंडर या पॉलिसीधारक की मृत्यु के माध्यम से एलआईसी के रिकॉर्ड से बाहर नहीं निकली हैं, 'पॉलिसीहोल्डर रिजर्वेशन पोर्शन' के लिए पात्र हैं.

कोई लॉक-इन पीरियड नहीं

LIC के आईपीओ में कोई लॉक-इन पीरियड नहीं लगाया जाएगा. मतलब अगर आपको शेयर अलॉट होता है तो आप अपने सुविधाअनुसार कभी भी शेयर को बेच सकते है.

LIC IPO: डर भगाओ, पैसा कमाओ और चीन को भी 'पछाड़ो'

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IPO क्या है? आईपीओ की पूरी जानकारी | What is IPO in Hindi

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कोई भी काम हो पैसा कमाने के लिए आपको IPO क्या होता है? invest तो करना ही होता है। आप कैसा भी व्यापर शुरू करते हैं उसमें सबसे पहले आपको अपनी पूँछी लगानी पड़ती है उसके बाद ही कुछ होता है। दोस्तों आज के समय में शेयर मार्किट पूंजी इन्वेस्ट करने का प्रचलित जरिया बन गया है। चूँकि शेयर मार्किट का क्षेत्र काफी व्यापक हो गया है इसलिए कई लोगों को जानकारी नहीं होती है कि आखिर इसमें invest कैसे किया जाता है।

दरअसल छोटी-बड़ी कंपनियां अपने पैसों को कम्पनी में इन्वेस्ट करती हैं और IPO के जरिये मुनाफा कमाती हैं। बता दें सिर्फ कंपनियां ही नहीं बल्कि आप भी आई.पी.ओ के जरिये पैसा कमा सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर आई.पी.ओ क्या है और इसमें पैसे कैसे लगाएं? तो दोस्तों आपको चिंतत होने की जरुरत नहीं है क्योंकि आज के लेख हम आपको IPO से जुड़ी महत्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

क्या होता है आईपीओ | What is IPO in Hindi

आई.पी.ओ के माध्यम से कंपनियां फंड एकत्रित करती हैं। दरअसल नई या पुरानी या फिर छोटी-बड़ी कंपनियां एक्सचेंज में सूचीबद्ध होकर अपने शेयर्स की बिक्री सार्वजानिक करती हैं इस प्रक्रिया को ही आसान शब्दों में आई.पी.ओ (IPO) कहा जाता है।

यदि आप आईपीओ का अर्थ नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि आईपीओ का अर्थ आरंभिक सार्वजनिक निर्गम अर्थात इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Initial Public Offering) होता है। बता दें कि आईपीओ के जरिए आम लोगों को कंपनी में भाग लेने का मौका मिलता है एवं वे भी कम्पनी के एक हिस्सेदार बन जाते हैं।

किसी कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयर आई.पी.ओ से मार्किट में आ जाते हैं। अतः शेयर्स मार्किट में उतारे गए शेयर्स को यदि एक बार कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग की परमिशन मिल जाती है तो इन शेयर्स को निवेशकों द्वारा बेंचा व खरीदा जा सकता है।

आईपीओ कितने प्रकार का होता है | Types of IPO in Hindi

दोस्तों यदि आप किसी भी चीज में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको उसकी पूरी जानकरी होना चाहिए। इसलिए आपको आई.पी.ओ में इन्वेस्ट करने से पहले यह मालूम होना जरूरी है कि आईपीओ कितने प्रकार का होता है। यदि आप इसके प्रकार नहीं जानते हैं तो बता दें कि मुख्य रूप से आईपीओ के दो प्रकार होते हैं और ये कुछ इस तरह हैं –

1. निश्चित मूल्य निकास | Fixed Pricing Offer

निश्चित मूल्य निकास को Fix Price Ipo भी कहा जाता है। दोस्तों जैसा कि इसके नाम से ही विदित हो रहा कि इस प्रकार का आई.पी.ओ फिक्स रहता होगा। दरअसल निश्चित मूल्य निकास आईपीओ में कंपनी अपने ग्राहकों के साथ कंपनी की संपत्ति, वित्तीय पहलुओं के मूल्यांकन आदि पर चर्चा करने के बाद मुनाफा प्राप्त करने के लिए या निकास मूल्य तय करने के लिए इन्वेस्टर बैंक के साथ मिलकर आईपीओ का जो निश्चित मूल्य तय करती है उसको ही निश्चित मूल्य निकास या Fix Price Ipo के नाम से परिभाषित किया जाता है।

2. बुक बिल्डिंग निकास | Book Building Offering

बुक बिल्डिंग आईपीओ में प्रतिदिन मांग ज्ञात की जाती है जिसके लिए एक बुक बनाई जाती है इसलिए इस आईपीओ को बुक बिल्डिंग निकास के नाम से जाना जाता है। अतः बिल्डिंग निकास निश्चित मूल्य निकास से भिन्न होता है। दरअसल बुक बिल्डिंग निकास में कंपनी इन्वेस्टर बैंक के साथ मिलकर एक मूल्य बैंड निश्चित करती है।

बता दें कि जब बुक बिल्डिंग निकास मूल्य बैंड निश्चित हो जाता है तो निवेशक शेयरों की कीमत के साथ बोली लगा सकता है एवं बोलियों के अनुरूप ही शेयर मूल्य का निर्णय लिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मूल्य बैंड अधिक कीमत वाले मूल्य को कैप मूल्य कहा जाता है जबकि सबसे कम मूल्य को फ्लोर मूल्य कहा जाता है। इसके आलावा भारत में कंपनियां अधिक से अधिक IPO बुक बिल्डिंग का सहारा लेती हैं।

आई.पी.ओ क्यों जारी किया जाता है | Why Companies Issue IPO

किसी तरह की कंपनी हो या फिर कोई भी दुकान हो सभी अपने व्यापर में बढ़ोत्तरी करना चाहते हैं ठीक इसी प्रकार कंपनी को अपने काम को बढ़ाने के लिए पैसों की आवश्यकता पड़ती है एवं इस जरुरत को पूरा करने के लिए कंपनी आईपीओ का सहारा लेती है।

दरअसल जब कंपनी के पास पैसों की कमी होती है उस समय कम्पनी IPO जारी करती है। जब आई.पी.ओ शेयर्स, मार्किट में लिस्टेड हो जाते हैं तो कंपनी द्वारा शेयर्स बेचकर पैसा कमाती है एवं आईपीओ खरीदने वाले ग्राहकों को कंपनी की हिस्सेदारी प्राप्त हो जाती है। आसान शब्दों में कहा जाए तो कंपनी अपनी राशि में वृद्धि करने के लिए आईपीओ जारी करती है।

आईपीओ में निवेश कैसे IPO क्या होता है? किया जाता है | How to invest in IPO

आई.पी.ओ में निवेश करने के लिए आपको सबसे पहले डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट खोलना होगा। डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट आप ऑनलाइन, अपने बैंक या किसी भी शेयर ब्रोकर के पास जाकर खुलवा सकते हैं। जब आपका डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट खुल जाता है तो इसके बाद आप जिस भी किसी कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उस कंपनी को आप आवेदन कर सकते हैं।

आईपीओ में निवेश करने के लिए आपको इस बात पर विशेष ध्यान रखना होता है कि आपकी निवेश की जाने वाली राशि डीमैड अकाउंट से लिंक्ड अकाउंट में होनी चाहिए। बता दें कि जब तक शेयर अलॉट नहीं होता है तब तक आपके अकाउंट से निवेश की राशि नहीं कटती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कंपनी द्वारा निर्धारित किये गए लॉट में शेयर्स खरीदने होते हैं।

आई.पी.ओ में निवेश करने के फायदे | Benefits of IPO in Hindi

निवेश के तो और भी कई तरीके हैं फिर आखिर आईपीओ में निवेश क्यों किया जाए? इसकी जानकारी सेने के लिए हमें आपको इसके फायदों से रूबरू करवाना होगा। तो चलिए आईपीओ में इन्वेस्ट करने के कुछ फायदे देख लेते हैं

1. कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का मौका आपको IPO देता है।

2. आईपीओ की मदद से आप कम पूंजी में अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

3. IPO के माध्यम से आपको शेयर मार्केट में जाने का मौका मिलता है।

4. आईपीओ में खरीदे गए शेयर्स को आप कभी भी बेच सकते हैं।

5. आप जिस कंपनी का आईपीओ खरीदते हैं उस कंपनी में आपको हिस्सेदारी का मौका मिलता है।

आई.पी.ओ से होने वाले नुकसान | Demerits of IPO in Hindi

1. कंपनी द्वारा शेयर्स की कीमत पहले ही तय की जाती है जिससे कई बार बाद में निवेशक को नुकसान उठाना पड़ता है।

2. यदि निवेशक कंपनी को आईपीओ वैल्यूएशन का ज्ञान नहीं होता है तो निवेशक को नुकसान हो सकता है।

4. IPO में शेयर्स की परफॉर्मेंस के किसी भी प्रकार के आंकड़े नहीं होते हैं जिसकी वजह से आई.पी.ओ को जोखिमभरा माना जा सकता है।

आईपीओ से सम्बंधित अन्य जानकारी | Other Information related to IPO

1. कम्पनी द्वारा जारी किए गए शेयर्स यदि IPO में निवशकों द्वारा नहीं खरीदे जाते हैं तो कम्पनी जारी किये गए शेयर्स वापस ले लेती है।

2. दोस्तों आईपीओ टीमों का गठन प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार, अंडरराइटर, विनिमय आयोग आदि के विशेष जानकारों के साथ मिलकर किया जाता है।

3. मर्चेंट बैंकर किसी भी कंपनी में आईपीओ के लिए सबसे आवशयक पार्टनर होता है।

आईपीओ की विस्तृत जानकारी | Video of What is IPO in Hindi

तो दोस्तों ये थी आईपीओ के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी। हम आशा करते हैं की आप Ipo से भलीभांति परिचित हो गए होंगे और आपको दोबारा what is ipo in hindi नहीं पूछना पड़ेगा । अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूलें और हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें ताकि आपको ऐसी ही जानकारी मिलती रहे।

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IPO kya hota hai ? IPO मे निवेश कैसे करे ?

IPO kya hota hai?

जो निवेश नहीं है लेकिन आप वो भी कर सकते है। लेकिन यह जरूर ध्यान रखे की कौनसा IPO किस दाम पर लिस्ट होगा वो 100 प्रतिशत तो किसीको नहीं पता होता इस लिए वहा पर नुकशान भी हो सकता है। इस लिए आप जो भी करे सोच समझ कर करे।

उम्मीद करता हु दोस्तों की आपको IPO kya hota hai? वह समज़ आ गया होगा। यदि फिर भी आप को कुछ समझने में दिक्कत आयी होतो Comment Box में हमें बताए। हम आपको समझाने का पूरा प्रयास करेंगे।

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IPO क्या होता है?

You are currently viewing IPO और FPO में क्या अंतर है !!

IPO और FPO में क्या अंतर है !!

  • Post author: Ankita Shukla
  • Post published: March 11, 2019
  • Post category: Gyan
  • Post comments: 0 Comments

नमस्कार दोस्तों…आज हम आपको “IPO और FPO” के विषय में बताने जा रहे हैं. आज हम बताएंगे कि “IPO और FPO क्या है और इनमे क्या अंतर होता है?”. सभी व्यावसायिक संस्थाओं को अपने दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए धन की आवश्यकता होती है। और व्यापार के लिए धन जुटाने के 2 तरीके होते हैं, पहला इक्विटी के रूप में और दूसरा डेब्ट के रूप में. जब बात इक्विटी की आती है, तो कंपनी बहुत से लोगों को अपने शेयर खरीदने के लिए एप्रोच करती है. और जब वो पहली बार एप्रोच करती है तो उसे IPO या initial public offering कहते हैं और जब एक से अधिक बार करती है तो उसका नाम follow-on public offering, (FPO) कर दिया जाता है. दोस्तों आज हम आपको इन्ही दोनों के विषय में बताने जा रहे हैं. तो चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक.

IPO क्या है | What is IPO in Hindi !!

IPO क्या है | What is IPO in Hindi !!

IPO का फुल फॉर्म “Initial Public Offering” होता है, जो किसी कंपनी के इक्विटी शेयरों की पहली सार्वजनिक पेशकश है, जब पहली बार कंपनी अपने इक्विटी शेयर को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करती है और सार्वजनिक रूप से कारोबार करती है, तो वो IPO कहलाता है. ये आम जनता द्वारा अपनी परियोजनाओं के वित्त के लिए धन प्राप्त करने का मुख्य साधन होता है.

इसमें आम जनता (निवेशक) अपना पैसा स्टॉक मार्किट के जरिये कंपनी में लगाती है और कंपनी बदले में निवेशकों को शेयर आवंटित करती है। यह कंपनी के जीवन चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ये अधिकतर छोटे से नज़दीकी कंपनी से रूपांतरित होता है, जो अपने व्यवसाय या बड़े निजी स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करने के लिए विस्तार करना चाहता है।

FPO क्या है | What is FPO in Hindi !!

FPO क्या है | What is FPO in Hindi !!

FPO का फुल फॉर्म “Follow-on Public Offering” होता है, हम नाम से ही अनुमान लगा सकते हैं कि यह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर निवेशकों को शेयरों का सार्वजनिक मुद्दा है. ये प्रक्रिया IPO के बाद आती है. जिसमे कंपनी अपने इक्विटी के आधार पर विविधता लाने के उद्देश्य से एक बार फिर से शेयर्स को आम जनता के लिए issue करने जाती है. शेयरों को कंपनी द्वारा प्रॉस्पेक्टस नामक एक प्रस्ताव दस्तावेज़ के माध्यम से बिक्री के लिए पेश किया जाता है। सार्वजनिक पेशकश पर अनुसरण के दो प्रकार हैं:

  • दिलकश पेशकश (Dilutive offering)
  • गैर-दिलकश पेशकश (Non-Dilutive offering)

Difference between IPO and FPO in Hindi | IPO और FPO में क्या अंतर है !!

# IPO का फुल फॉर्म “Initial Public Offering” और FPO का फुल फॉर्म “Follow-on Public Offering” होता है.

# IPO, किसी कंपनी के इक्विटी शेयरों की पहली सार्वजनिक पेशकश है, जब पहली बार IPO क्या होता है? कंपनी अपने इक्विटी शेयर को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करती है और सार्वजनिक रूप से कारोबार करती है, तो वो IPO कहलाता है जबकि एक से अधिक बार यदि कोई कंपनी अपने इक्विटी शेयरों की सार्वजनिक पेशकश करती है तो वो FPO कहलाती है.

# IPO कंपनी के शेयरों का पहला सार्वजनिक निर्गम है जबकि, FPO कंपनी के शेयरों का दूसरा या तीसरा सार्वजनिक निर्गम है।

# IPO एक असूचीबद्ध कंपनी द्वारा शेयरों की पेशकश है और जब कोई सूचीबद्ध कंपनी यह पेशकश करती है तो उसे फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग के रूप में जाना जाता है अर्थात FPO के रूप में।

# सार्वजनिक निवेश के माध्यम से पूंजी जुटाने के उद्देश्य से IPO बनाया जाता है जबकि FPO बाद के सार्वजनिक निवेश के उद्देश्य से बनाया गया।

आशा हैं आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी से कुछ लाभ अवश्य मिला होगा और साथ ही आपको हमारा ब्लॉग पसंद भी आया होगा. यदि फिर भी आपको कोई त्रुटि दिखाई दे, या कोई सवाल या सुझाव आपके मन में हो. तो आप हमे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के बता सकते हैं. हम पूरी कोशिश करेंगे कि हम आपकी उम्मीदों पे खरा उतर पाएं। धन्यवाद .

Ankita Shukla IPO क्या होता है?

✔️ izoozo.com Provide Hindi & English Content Writing Services @ low Cost ✔️अंकिता शुक्ला Oyehero.com की कंटेंट हेड हैं. जिन्होंने Oyehero.com में दी गयी सारी जानकारी खुद लिखी है. ये SEO से जुडी सारे तथ्य खुद हैंडल करती हैं. इनकी रूचि नई चीजों की खोज करने और उनको आप तक पहुंचाने में सबसे अधिक है. इन्हे 4.5 साल का SEO और 6.5 साल का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है !! नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में आपको हमारे द्वारा लिखा गया ब्लॉग कैसा लगा. बताना न भूले - धन्यवाद . !!

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आईपीओ (IPO) क्या होता है ?

जब कोई कम्पनी पहली बार अपने शेयर को पब्लिक में ऑफर करती है यानी शेयर को इशू करती है उसे आई पी ओ (IPO) कहते है।

IPO किसी भी एक कम्पनी को शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है और बड़ी पूंजी एक व्यक्ति पास होना संभव नही है। यदि कम्पनी की पूंजी को छोटे अंशो ipo meaning in hindi यानी शेयर में बाट दिया जाता है तो बहुत से लोग कम्पनी के शेयर खरीदकर कम्पनी के मालिक बन सकते है।
तो जब किसी कम्पनी को अपने अपने खर्चो को पूरा करने के लिए या कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए या वर्किंग कैपिटल के लिए पब्लिक में अपने शेयर को इशू (Issue) करती है और कोई भी अपनी क्षमता अनुसार शेयर खरीदकर कम्पनी में हिस्सेदार बन सकता है।

कम्पनी के प्रमोटर शेयर का एक हिस्सा अपने पास रखते है अन्य शेयर को मार्किट में IPO के नाम से इशू करते है जो शेयर कम्पनी के प्रमोटर के पास होते है वह शेयर मार्केट में ट्रेड नही किये जाते। शेयर मार्केट में केवल वही शेयर ट्रेड किये जाते है जो पब्लिक में इशू होते है।

IPO कैसे इशू होता है?

IPO (आई पी ओ) इशू करने के लिए कमपनी को एक मर्चेंट बैंकर को अप्पोइन्ट करना होता है मर्चेंट बैंकर कम्पनी की इनफार्मेशन को इकहट्टा करता है फिर मर्चेंट बैंकर को IPO के लिए सेबी (सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) से अप्रूवल के लिए आवेदन करता है ipo meaning in hindi फिर सेबी कम्पनी के इनफार्मेशन चेक करती है यदि सेबी को कंपनी की इनफार्मेशन सही लगती है आईपीओ अर्थतो सेबी से कम्पनी को IPO के लिए अप्रूवल मिल जाता है सेबी से अप्रूवल मिलने के बाद कम्पनी एक साल में कभी भी IPO इशू कर सकती है।

IPO से शेयर कैसे खरीदे ?

IPO शेयर खरीदने के लिए एक डिमैट एकाउंट होना आवश्यक है डिमैट एकाउंट के द्वारा IPO के इशू शेयर खरीदे जाते है IPO 3 दिन तक खुला रहता है जिसमे कोई भी व्यक्ति शेयर को खरीद सकता है IPO से खरीदे गए शेयर को 1 महीने तक बेचा नही जा सकता है। ipo meaning in hindi कम्पनी आई पी ओ इशू करने के साथ 'कम से कम' और 'ज्यादा से ज्यादा' शेयर की लिमिट तय करती है और कम्पनी यह भी बताती है की इस IPO के द्वारा कितना फण्ड इकहट्टा करेगी और इसका उपयोग कहा किया जाएगा।

IPO क्यो इशू किया जाता है?

आई पी ओ (IPO) ipo news इसलिए किया जाता है जब कम्पनी को बड़ा किया जाता है ipo meaning in hindi
या कम्पनी को अपना खर्च पूरा करने के लिए या कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए या वर्किंग कैपिटल के लिए तथा अन्य कारण भी हो सकते है जिसके लिए कंपनी को बड़े फण्ड की आवश्यकता होती है जो किसी एक व्यक्ति से मिलना संभव नही है इसलिए कम्पनी IPO (आई पी ओ) इशू करती है।

उम्मीद करते है कि आपको 'ipo क्या होता है ,ipo kya hota hai' के विषय मे सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी।

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