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क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन

क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन

क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने शनिवार को कहा कि आयकर विभाग (Income tax) ने हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu) में कुछ फिल्म निर्माताओं (Film Producers), वितरकों और फाइनेंसरों पर छापेमारी के बाद 200 करोड़ रुपये से अधिक की "अघोषित" आय का पता लगाया है. दो अगस्त को तलाशी शुरू की गई और चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर और वेल्लोर में करीब 40 परिसरों को कवर किया गया. इनकी पहचान जाहिर नहीं की गई है. विभाग ने छापेमारी के दौरान 26 करोड़ रुपये की “अघोषित” नकदी और 3 करोड़ रुपये से अधिक के सोने के आभूषण जब्त करने का दावा किया है.

आयकर विभाग ने छह जुलाई को बेंगलुरु स्थित माइक्रो लैब्स लिमिटेड के क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन खिलाफ नौ राज्यों में 36 परिसरों पर छापेमारी की थी.

एक बिल्डर को लोटस ने प्लॉट बेचा था. प्लाट बेचने में करोड़ों रुपयों का हुआ ट्रांजेक्शन हुआ था, जो ऑन रिकॉर्ड नहीं था. इसी कैश ट्रांसजेक्शन को इनकम टेक्स ने पकड़ा है.

डायरेक्‍टोरेट ऑफ रेवेन्‍यू इंटेलिजेंस (DRI) ने कहा है कि वीवो मोबाइल इंडिया ने लगभग 2,217 करोड़ रुपये की कस्‍टम ड्यूटी चोरी की है।

गडकरी ने कहा, " जो नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है, उसमें हम ये ध्यान रखेंगे कि शहर के इलाकों में स्थापित टोल प्लाजा खत्म हो जाएं और लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाए. "

बढ़ती महंगाई पर सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने आज बीजेपी (BJP) सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि जीएसटी (GST) मतलब "गरीब शोषण टैक्स" है. सांसद चड्ढा ने संसद में स्वर्ण मंदिर की सरायों पर जीएसटी लगाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा- बीजेपी का स्वर्ण मंदिर की सरायों पर जीएसटी लगाना सिखों और पंजाबियों पर 'औरंगजेब का जजिया टैक्स' जैसा है. उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार ने रुपये को "मार्गदर्शक मंडल" में भेज दिया है.

सरकार ने सोमवार को 10 करोड़ और उससे अधिक के वार्षिक कारोबार वाली संस्थाओं के लिए 1 अक्टूबर से अनिवार्य ई-चालान का विस्तार किया है.

साक्ष्‍यों के विश्‍लेषण से पता चला है कि ग्रुप, अपनी पबिलक लिमिटेड कंपनियों के अकाउंट बुक्‍स में हेराफेरी में भी संलिप्‍त था. तलाशी की कार्रवाई में 1 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि के बे‍हिसाब लेनदेन का पता चला है.

तमिलनाडु ( Tamil Nadu) में लगभग 10 फिल्म निर्माताओं और वितरकों से जुड़े परिसरों पर आयकर (Income tax) के छापे मारे जा रहे हैं, जिनमें कलाईपुली ​​थानू, एसआर प्रभु, अंबु चेझियां और ज्ञानवेल राजा शामिल हैं.

"पेट्रोल और डीजल की कीमतें 26 जून 2020 और 19 अक्टूबर 2014 से बाजार से निर्धारित होने वाली बना दी गई. तब से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) इसकी कीमतें तय करती हैं."

30% से ज्यादा की गिरावट के बाद भी जाने क्यों निवेशकों को दिखता है क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का मौका

दुनिया की सबसे प्रचलित क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Bitcoin) की कीमतों में पिछले 24 घंटों में 31% से अधिक की गिरावट आई है

दुनिया की सबसे प्रचलित क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Bitcoin) की कीमतों में पिछले 24 घंटों में 31% से अधिक की गिरावट आई है, वहीं दुनिया की दूसरी सबसे पॉपुलर डिजिटल करेंसी इथेरियम (Ethereum) की कीमतें भी पिछले 24 घंटे में 35% से अधिक गिरी हैं। यही हाल दूसरी क्रिप्टोकरेंसी का भी है।

कल शाम 7 बजे बिटक्वाइन 24% की गिरावट के साथ 33,870.20 डॉलर यानी 24.30 लाख रुपये पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, इथेरियम 35.40% की गिरावट के साथ 2301 डॉलर पर आ गया था। इसी तरह ही डोगक्वाइन (Dogecoin) की कीमतों में 34.80% की गिरावट पिछले 24 घंटे में आई और यह आज शाम 7 बजे 0.321411 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था।

दूसरे क्रिप्टोकरेंसी की बात करें तो पिछले 24 घंटे में XRP की कीमतों में 42% और Stellar की कीमतों में 43% की कमी आई है। इसी तरह Cardano की कीमतें भी 35% से अधिक गिरी हैं। चीन ने कहा कि वह क्रिप्टो को पेमेंट के रूप में स्वीकार नहीं क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन करेगा। ब्रिटेन पहले ही साफ कर चुका है कि वह इसे बैन करने के लिए कानून बनाएगा। भारत भी कानून बनाने की तैयारी में है।

इस खबर पर बाजार दिग्गजों की राय पर नजर डालें तो अधिकांश की राय है कि उतार-चढ़ाव बाजार का मूल स्वभाव है। इसलिए क्रिप्टोकरेंसी में आई इस गिरावट से बहुत ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है । वास्तव में यह काफी अच्छा करेक्शन है। बाजार भागीदारों को क्रिप्टोकरेंसी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए इस मौके का उपयोग करना चाहिए।

WazirX के Siddharth Menon का कहना है कि बिटकॉइन में आई यह गिरावट पहले से ही उम्मीद थी क्योंकि कोई भी चीज लगातार एक ही दिशा में नहीं जा सकती। इसके पहले एक ही कारोबारी दिन में हमें इसकी कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली है। इसलिए हालिया गिरावट को लेकर पैनिक होने की जरुरत नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि यह बिटकॉइन में आया बहुत अच्छा करेक्शन है। इसके लिए 28000 डॉलर बहुत अच्छा सपोर्ट लेवल है। इसके पहले 38000 Fibonacci सपोर्ट था। इसकी कीमतें अभी भी लिमिट में है। अगर बिटकॉइन 19000 डॉलर का जोन तोड़ता है तो फिर ये खतरनाक होगा जिसकी संभावना नहीं दिखती।

क्रिप्टो, भारी उतार-चढ़ाव का फंदा, फोमो, और सारा आसमां

क्रिप्टो क्या है और यह इतना अस्थिर क्यों है? - स्मार्ट मनी

भारत में सोना, पारंपरिक रूप से सबसे लोकप्रिय इन्वेस्टमेंट रहा है और यहाँ घरों में सामूहिक रूप से जमा 25,000 टन सोने का सबसे बड़ा निजी स्टॉक है। हालांकि इन्वेस्टमेंट के तौर पर इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि यह नई संपत्ति का सृजन है और इसे सुरक्षित रखने के लिए पैसे खर्च होते हैं। भारतीय शेयर बाजार आज इन्वेस्टमेंट और ट्रेड के लिए लोकप्रिय स्थान हैं और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा के कारण इन्वेस्टर और ट्रेडर दोनों के लिए इन बाज़ारों में ट्रेड करना आसान हो गया है। हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि ये एकमात्र तरीके नहीं हैं जिनसे लोग अपने फंड को इन्वेस्ट या ट्रेड कर सकते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

टेक्कीनोलॉजी की दुनिया हुई तरक्की और साथ ही स्मार्ट डिवाइस और नॉलेज दोनों की पहुंच ने आज क्रिप्टोकरेंसी को बेहद लोकप्रिय बना दिया है। क्रिप्टोकरेंसी को ऐसे समझें कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वर्चुअल करेंसी है और जिसकी सुरक्षा क्रिप्टोग्राफी के ज़रिये होती है। सीक्योरिटी की इस परत से इस करेंसी को फोर्ज या डबल स्पेंड करना एकदम असंभव है। इसकी बनावट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई क्रिप्टोकरेंसी को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ज़रिये बनाया गया है जिससे बगैर एडिट किये सारी जानकारी रिकॉर्ड करने और जारी करने में मदद मिलती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह टेक्नोलॉजी विभिन्न किस्म के एन्क्रिप्शन के ज़रिये करेंसी पर नियंत्रण रखती है। किसी भी फंड ट्रांसफर को वेरीफाय करने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का अलग से उपयोग किया जाता है। ब्लॉकचेन से अंततः यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि हर क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन लेन-देन ईमानदारी होता है। क्रिप्टोकरेंसी जो चीज़ सबसे अलग बनाती है, वह यह है कि इसका उपयोग सेंट्रल अथॉरिटी नहीं करती है। इसकी प्रासंगिकता यह है कि करेंसी के रूप में यह सरकार के किसी भी हस्तक्षेप या फेर-बदल के मामले में यह तकनीकी रूप से इम्यून है।

फिलहाल बाजार में कुछ सबसे प्रभावी क्रिप्टोकरेंसी में इथेरियम (ईटीएच), लिटकॉइन (एलटीसी), पोल्काडॉट (डॉट) और बिटकॉइन (बीसीएच) शामिल हैं, लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं हैं।

क्रिप्टोकरेंसी में इतना उतार-चढ़ाव क्यों होता है?

क्रिप्टोकरेंसी पहले दिन से ही भारी उतार-चढ़ाव के लिए जानी जाती है। इन्वेस्टर ने उछाल के दौरान बहुत पैसा कमाया है और जब बाज़ार टूटा तो उन्हें भारी नुकसान भी हुआ है। क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह की जांच नीचे की गई है।

सट्टेबाजी की ताक़त - क्रिप्टोकरेंसी का उतर-चढ़ाव काफी हद तक इन्वेस्टर और ट्रेडर के सट्टे की प्रकृति से जुड़ा है जिनमें से कुछ बाज़ार में उछाल के साथ भारी मुनाफ़ा दर्ज़ करने की संभावना से सम्मोहित हैं। बड़े पैमाने पर सट्टे पर आधारित दांव लगाने से उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार को और अस्थिर बनाते हैं।

ट्रेडर की जानकारी – शेयर बाजार और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के उलट, क्रिप्टोकरेंसी डोमेन में इन्वेस्ट करने के लिए बहुत जानकारी जुटाने की ज़रुरत नहीं होती है। इन्वेस्टर के पास सिर्फ इंटरनेट और थोड़े से पैसे होने चाहिए। यही इस बाजार को कम कम या बगैर किसी अनुभव वाले ट्रेडर के लिए इतना आकर्षक बनाता है। इंस्टीच्यूशनलाइज्ड ट्रेडिंग मार्केट में शामिल लोग क्रिप्टोकरेंसी बाजार से बहुत सावधान और सतर्क रहते हैं और इसमें निवेश को जोखिम के तौर पर में देखते हैं। इसलिए इस डोमेन में औसत इन्वेस्टर को क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में की बारीकियों के बारे में कम जानकारी होती है। वे प्रचार, अनिश्चितता, संदेह, डर और ज़बरदस्त हेराफेरी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस डोमेन के औसत ट्रेडर के विपरीत परिस्थितियों में शांत बने रहने की संभावना कम होती है जबकि अनुभवी ट्रेडर का खुद पर पूरा नियंत्रण होता है।

भरोसे पर निर्भर - क्रिप्टोकरेंसी की डिजिटल प्रकृति का मतलब है कि इसका कोई फिजिकल स्वरूप नहीं क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन है। इसके बजाय, इसकी कीमत पूरी तरह से मांग और आपूर्ति पर निर्भर है। अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी की आपूर्ति पूर्व निर्धारित या अनुमानित होती है, इसलिए उनकी कीमतें इस बात से नियंत्रित होती हैं कि उनमें कितनी दिलचस्पी रही है और कितने लोग करेंसी खरीदना चाहते हैं। नतीजतन,करेंसी की कीमत उस भरोसे पर निर्भर है जो लोग उसमें जताते हैं। ऐसे में लोगों का इस पर से भरोसा उठ जाता है और वे अपनी करेंसी बेचने का मन बना सकते हैं जिससे इसकी कीमत लुढ़क सकती है।

बेहद कम मार्केट ऑपरेशन - क्रिप्टोकरेंसी अब तक इन्वेस्टर और ट्रेडर की प्राथमिकता और दिलचस्पी नहीं बनी हैं। हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी का बाजार दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो गया, यह अभी भी वैल्यूएशन के क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन लिहाज़ से सोने के बाजार से पीछे है। सोने का बाज़ार कुल 7.9 ट्रिलियन डॉलर का है और अमेरिकी बाज़ार इसका 14 गुना है जिसकी वैल्यूएशन 28 ट्रिलियन डॉलर है। अपेक्षाकृत छोटे उभरते बाजार के रूप में, छोटी इकाइयों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमत पर असर डालने की क्षमता अधिक होती है।

टेक्नोलॉजी के उपयोग को परफेक्शन दिया जा रहा है - विभिन्न किस्म की क्रिप्टोकरेंसी की मदद के लिए उपयोग की जाने वाली ब्लॉकचेन और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी में अभी परफेक्शन लाया जा रहा है। समस्या ब्लॉकचेन की स्केलेबिलिटी से लेकर नेटवर्क कंजेशन और लेन-देन की बढ़ती लागत तक है। कहा जा रहा है कि टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

मीडिया की भूमिका - क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों को प्रभावित क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन करने में मीडिया प्रमुख भूमिका निभाता है। इससे संबंधित ख़बरें करेंसी में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकती हैं। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कई इन्वेस्टर और ट्रेडर उन ख़बरों की बहुत छान-बीन नहीं कर पाते क्योंकि हो सकता है कि ये किसी विश्वसनीय स्रोत न आये हों।

ये सभी फैक्टर क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ाते हैं जो बगैर किसी समय-सीमा के किसी भी दिशा में जाने के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों को इस बाज़ार की चाल का अनुमान लगाने में अभी काफी समय लगेगा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इन्वेस्ट करना -

क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ारों में निवेश करने के इच्छुक लोगों को इसकी अस्थिरता से जुड़े नुकसान के बारे में पता होना चाहिए। मशहूर हस्तियों के समर्थन से विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी की कीमत प्रभावित होती है। मसलन डॉगकॉइन को ही लें, जिसमें इलॉन मस्क के प्रमोट करने से उछाल दर्ज़ हुई। कहा जा रहा है कि ऐसे एंडोर्समेंट से ये करेंसी कहां जाएंगी इसका कोई अता-पता नहीं क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन है। इसका मतलब यह है कि इस करेंसी के वैल्यूएशन में नाटकीय रूप से गिरावट आ सकती है। बड़ी रकम इन्वेस्ट करने से पहले लोगों को अपनी पसंदीदा क्रिप्टोकरेंसी की मौजूदा क्रिप्टो टेक्नोलॉजी को समझने का प्रयास ज़रूर करना चाहिए। इसके अलावा बड़ी मात्रा में इन्वेस्ट करने से पहले उन्हें इसके बाज़ार रुझान और इसी तरह की और करेंसी की जांच-परख ज़रूर करनी चाहिए और समझना चाहिए कि इनमें इतना उतार-चढ़ाव क्यों आता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी और ज्ञान देने के उद्देश्य से लिखा गया है। एंजेल वन लिमिटेड इस लेख में क्रिप्टोकररेंसीज़ में निवेश का किसी भी तरीके से प्रचार नहीं कर रहा है।

रघुराम राजन का बिटकॉइन पर ध्रुवीकरण वाला रुख

बिटकॉइन पर रघुराम राजन - स्मार्ट मनी

यह बढ़ रहा है और लोग इस बेशुमार बढ़त के दौर में कुछ फायदा उठाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी की ओर भाग रहे हैं और इस बढ़त का इस बार कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। पिछले साल बिटकॉइन गिरकर 10,000 डॉलर पर आ गया और दिसम्बर 2020 में यह 40,000 डॉलर पर पहुँच गया। इस प्रक्रिया में कई खुदरा निवेशक भी इस ब्लॉकचेन दुनिया में अन्य ऑल्टकॉइन के साथ पैसे बनाने आ गये। हालांकि भारत के मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन जिन्होंने 2008 के वित्तीय संकट की ठीक-ठीक भविष्यवाणी की थी, वह न बिटकॉइन से प्रभावित हैं और न ही बिटकॉइन में इस बढ़त को वृद्धि की रूपरेखा मानते हैं। सो इस शीर्ष अर्थशास्त्री की बिटकॉइन पर क्या राय है?

इससे पहले बिटकॉइन अर्थव्यवस्था और क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में इसकी भूमिका पर एक निगाह डालते हैं। बिटकॉइन या अन्य कोई भी अन्य क्रिप्टोकरेंसी मुख्य रूप से मूल्य के लेन-देन का डिजिटल माध्यम है। दरअसल यदि आपके पास एक बिटकॉइन है तो आपके पास कोई वस्तु नहीं है, या ऐसी चीज़ नहीं है जो वास्तविक दुनिया की किसी चीज़ का प्रतिनिधित्व करती हो। हालांकि, आप अपने बिटकॉइन को किसी और को बेच सकते हैं और इसके बदले में डॉलर या रुपये वसूल सकते हैं। यहीं पर बिटकॉइन के साथ परेशानी खड़ी होती है।

बिटकॉइन अभी आपको कितने डॉलर देगा, और साल भर बाद कितना क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन इसमें काफी फर्क हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अपेक्षाकृत स्थिर वास्तविक दुनिया की मुद्राओं के मुकाबले बिटकॉइन की कीमत बहुत उतार-चढ़ाव होता है। और इससे हमारा मतलब है, बेहद उतार-चढ़ाव। इतना अधिक कि कुछ लोग जिन्होंने 2009 में पांच सौ रुपये में दस बिटकॉइन खरीदे थे और 2017 तक या पिछले साल तक रखा हुआ था, वे अब तक करोड़पति हो गए होंगे। और ऐसे लोग हैं - सबसे उल्लेखनीय है विंकलवॉस ट्विन्स, जिन्हें इंटरनेट पर बिटकॉइन अरबपतियों के रूप में जाना जाता है। तो बिटकॉइन इतना महंगा क्यों हो गया, और रघुराम राजन इससे नाखुश क्यों हैं?

जब बिटकॉइन चलन में आये थे तो वे निश्चित संख्या में ही बनाए गए थे। हमेशा केवल कुछ मिलियन बिटकॉइन ही होंगे, और आखिरी बिटकॉइन 2140 के आसपास बनेगा। हाँ, बिटकॉइन का खनन होता है - सोने की तरह, और यही वजह है कि कुछ अर्थशास्त्रियों ने बिटकॉइन को सोने के बराबर रखा है। दरअसल, कुछ का मानना है कि बिटकॉइन 21 वीं सदी में सोने के बराबर है - फर्क सिर्फ इतना है कि आप इससे कहीं से भी जुड़ सकते हैं और जब चाहे इसकी कीमत भुना सकते हैं। बिटकॉइन खनन समय के साथ और अधिक महंगा होता जा रहा है - क्योंकि कुछ बिटकॉइन के खनन के लिए, आपको बेहद क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन मुश्किल गणितीय समस्याओं को हल करना होगा, जिसमें भारी मात्रा में कंप्यूटिंग शक्ति की ज़रुरत होती है। बिटकॉइन खनन कम्प्यूटेशन और बिजली के लिहाज़ से इतना महंगा होता है, कि बिटकॉइन खनन से दुनिया भर में कार्बन फुटप्रिंट में काफी बढ़ोतरी होती है।

पिछले साल, सिटीबैंक के एक विश्लेषक ने भविष्यवाणी की थी कि 2021 में बिटकॉइन एक लाख डॉलर के स्तर को पार कर जाएगा, और क्रिप्टोकरेंसी में रूचि रखने वाले कई अन्य लोगों ने बहुत बड़ी संख्या का पूर्वानुमान लगाया है। लेकिन रघुराम राजन का मानना है कि बिटकॉइन में मौजूदा उछाल बुलबुले का सटीक उदाहरण है। उनके अनुसार, टेस्ला इंक, जो एस एंड पी 500 पर कारोबार करती है, की कीमत भी उसके वास्तविक मूल्य से बहुत अधिक है, जबकि टोयोटा और फोर्ड जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ टेस्ला के मुकाबले अपने वास्तविक आर्थिक उत्पादन से बहुत नीचे कारोबार कर रही हैं। इसलिए यदि बिटकॉइन में तेज़ी बुलबुला है, तो इसका मूल्य कहां से आता है?

इस साल की शुरुआत में, ईलॉन मस्क की वाहन कंपनी टेस्ला ने घोषणा की कि उसके पास 1.5 बिलियन डॉलर मूल्य के बिटकॉइन हैं - जिसके क्रिप्टोकरेंसी पर क़ानून को लेकर क्यों है उलझन बाद, बिटकॉइन ने अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया और 47,000 डॉलर पर कारोबार करने लगा। टेस्ला ने अपनी कारों के बदले में क्रिप्टोक्यूरेंसी भुगतान स्वीकार करने के इरादे से बिटकॉइन खरीदे - इसलिए यदि आपके पास बिटकॉइन हों आप आराम से उनसे टेस्ला कार खरीद सकते हैं। यहीं से चीजें दिलचस्प होने लगती हैं। रघुराम राजन के अनुसार, बिटकॉइन तकलीफदेह है क्योंकि इसके ज़रिये भुगतान स्वीकार करना किसी और के द्वारा अदा की जाने वाली वास्तविक धन राशि और दूसरी पार्टी द्वारा प्राप्त की गई राशि के बीच काफी असमानता पैदा कर सकता है। कल्पना कीजिये, अगर आप भारतीय रुपए में मोटरसाइकिल खरीद रहे हैं, और अचानक डीलरशिप ने आपको बताता है कि अब आपके वाहन की कीमत कल बताई गई कीमत से दोगुनी होगी क्योंकि अब, रुपए की खरीद शक्ति कल के मुकाबले आधी रह गई है। अच्छा नहीं लगता।

तो बिटकॉइन की कीमत में बेतहाशा उतार-चढ़ाव होता रहता है - अब क्या? और क्यों कुछ लोग अब भी इसके पीछे पागल हो रहे हैं? मूल रूप से, किसी को ऐसी मुद्रा में भुगतान करना जिसका वह उपयोग नहीं करता है, यह महंगा सौदा हो सकता है। आप इसे पेपाल के ज़रिये आसानी से कर सकते हैं, कंपनियां और देश हर साल सीमा पार भुगतान के लिए लेनदेन शुल्क के तौर पर अरबों डॉलर खर्च करते हैं। बिटकॉइन इन भुगतानों को सरल बनाने का पहला तरीका था। इतना आसान कि जैसे यूपीआई के ज़रिये 10 रुपये की चाय का भुगतान करना। यही कारण है कि कुछ विश्लेषकों को बिटकॉइन में मूल्य दीखता है।

वहीं अन्य विश्लेषक आम तौर पर ब्लॉकचैन के आइडिया पर दांव लगा रहे हैं। मूल रूप से, भुगतान मूल्य विनिमय का जरिया है, और इस मूल्य के विनिमय में स्थिरता बनाए रखने के लिए विश्वास की ज़रुरत होती है। कैसे? इसलिए जब आप अपने चायवाले को दस रुपये का भुगतान करते हैं, तो भारत सरकार यह सुनिश्चित करती है कि उन दस रुपये का मूल्य कुछ होगा - दूसरे शब्दों में, यह दोनों पक्षों के बीच विश्वास के माध्यम का काम करता है। बिटकॉइन में, और ब्लॉकचैन में, विशवास की यह अवधारणा एक खुले बहीखाता से तैयार की जाती है - जहां लेनदेन उन हजारों लोगों द्वारा सत्यापित किए जाते हैं जो बिटकॉइन का उपयोग कर रहे हैं। नतीजतन, यह खुला स्रोत है, और ब्लॉकचेन के साथ विश्वास कायम करना आसान है।

कोई फर्क नहीं पड़ता कि बिटकॉइन का वास्तविक मूल्य कहाँ स्थित है, मांग और आपूर्ति का अर्थशास्त्र लगातार इसके मूल्य को दहाई प्रतिशत में ऊपर और नीचे ले जाता है। रघुराम राजन को लगता है कि यह बिटकॉइन के लिए एक और बुलबुला है, और इसलिए इलॉन मस्क जैसे बिटकॉइन, ब्लॉकचेन और प्रोद्योगिकी के दीवानों के बारे में उनकी राय बिल्कुल उलट है। यह लेख जब लिखा जा रहा था तब बिटकॉइन में एक दिन में 57,000 डॉलर के उच्चतम स्तर छूने के बाद 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ हुई। क्या आपको लगता है कि यह एक और बुलबुला जो फूटने की प्रतीक्षा में है?

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