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ट्रेड वार की आहट से शेयर बाजार में कोहराम, जानिए 10 बड़ी बातें

ट्रेड वार की आहट से शेयर बाजार में कोहराम, जानिए 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वार की आहट से दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। भारतीय शेयर बाजार भी इस चपेट में आ गए और शुक्रवार को निफ्टी ने अपना 10000 का अहम स्तर तोड़ दिया। बाजार की इस गिरावट में कौन सी 10 बड़ी बातें एक आम निवेशक को पता होनी चाहिए हम अपनी इस रिपोर्ट में बता रहे हैं।

पाम तेल के रिकॉर्ड उत्पादन, निर्यात में गिरावट से विश्व बाजार में हड़कंप

पाम तेल के रिकॉर्ड उत्पादन एवं निर्यात में गिरावट की वजह से विश्व तेल बाजार में हड़कंप मच गया है। भारत में सोया पाम एवं कपास्या तेल भावोें का अंतर पिछले वर्षों के समान बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा खामियाजा सोयाबीन एवं तेल भावों पर पड़ेगा। सोया तेल उद्योग की हालत एक बार फिर खराब होने जैसी बन सकती है। सोया तेल की खपत में गिरावट आएगी। चीन में जानवरों को खिलाए जाने वाले पशु आहार में प्रोटीन की मात्रा 3 प्रतिशत कम कर दी तो वह 90 लाख टन सोयाबीन की खरीदी कम करेगा। महाराष्ट्र के सोयाडीओसी का थोड़ा-बहुत निर्यात हो रहा है। ब्राजील की फसल सामने दिखते ही मांग ठंडी पड़ जावेगी। ऐसी स्थिति में सोयाबीन किस भाव बिकेगा, यह कल्पना करना आसान नहीं है। केएलसीई थोड़ी-सी तेज आने पर सेल बंद करके बैठने वाले प्लांट पाम तेल वायदे में घनघोर मंदी आने के बाद ऊंचे भाव खोलकर बैठे रहे।

15 वर्ष के निचले स्तर पर

पिछले 15 दिन से विश्व तेल बाजारों में जो घमासान चल रहा था, उसका अंत भारत में टैरिफ विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें में परिवर्तन, रुपए की विनिमय दर में कमी से मंदी गहराने से हुआ है। तेल भावोें में कुछ समय के लिए तेजी का दौर समाप्त हो गया है। मंदी कितनी आती है, इसका बेसब्री से इंतजार करते रहे। मलेशिया पिछले 3 माह में स्टॉक 13 प्रतिशत बढ़ा है, तो उत्पादन में 9 प्रतिशत की विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें वृद्धि हुई है और निर्यात में 16 प्रतिशत की गिरावट आई है। मलेशिया की मुद्रा िरंगिढ़ लम्बे समय से कमजोर चल रही है। इसके अलावा विश्व में पाम तेल में मांग कम है। चीन ने भी खरीदी से हाथ खींच रखा है। पाम तेल 15 वर्ष के निचले स्तर पर चला गया है। पाम विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें तेल की मंदी ने पूरे विश्व के तेल बाजार को झकझोर कर रख दिया है। पूर्व के वर्षों के अनुसार सोया तेल, पाम तेल एवं कपास्या तेल में भावोें का अंतर बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव सोया तेल में मिलावट एवं खपत में कमी का पड़ेगा।

पशु आहार के प्रोटीन में कमी

हालाकि अभी तो अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का मामला उलझा हुआ है। यह कब सेटल होगा कोई नहीं जानता। चीन ने अन्य देशों से सोयाबीन की खरीदी शुरू कर रखी है। जानवरों को खिलाई जाने वाले डीओसी में प्रोटीन की मात्रा में 3 प्रतिशत करना जा रहा है। यदि इसमें चीन सफल हो गया तो विश्व बाजार में 90 लाख टन सोयाबीन की खरीदी कम करेगा। इसका प्रभाव विश्व बाजारों पर लगना पड़ेगा, यह जगजाहिर है। पिछले महीनों में ट्रेड वॉर शुरू हुआ है। इस वजह से सीजन के अंत में ब्राजील, अर्जेंटीना का सोयाबीन बिक गया था। इस बार दोनोें देशोंे में बड़ी फसल आ रही है। यदि फसल पूरी नहीं बिकी तो अमेरिका के समान ब्राजील की स्थिति भी खराब हो सकती है। ऐसी स्थिति में सोयाबीन एवं मील का भविष्य उज्ज्वल दिखाई नहीं दे रहा है। फिर मलेशिया के पाम तेल का प्रभाव कब कम होगा। इसका अंदाजा लगाना फिलहाल कठिन है।

सोया डीओसी 30 िदस. तक

महाराष्ट्र से सोया डीओसी का निर्यात हो रहा है। 15 एवं 30 दिसम्बर तक शिपसेंट हो जावेंगे। उसके बाद ब्राजील की फसल सामने दिखाई देने लगेगी। अभी तक सोयाबीन के भावोें को महाराष्ट्र वालों ने सहारा दे रखा था। जिस दिन से महाराष्ट्र वालों की सोयाबीन में खरीदी ठंडी पड़ी सोयाबीन औंधे मुंह गिर सकता है। फरवरी बाद सोयाबीन के भावों का परिदृश्य उज्ज्वल दिखाई नहीं दे रहा है। मप्र में सोयाबीन किसानों को 500 रुपए का बोनस मिल रहा है। इससे असंतोष नहीं है। इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन विगत वर्ष से अधिक हुआ है। अत: आने वाले महीनों में आपूर्ति सरल बनी रहेगी। जानकारों का मत है कि विश्व तेल बाजार में अमेरिका चीन ट्रेड वॉर ने सर्वाधिक खराबी आई है। अमेरिका ने सोयाबीन के सबसे बड़े खरीदार को विचलित कर दिया है। चीन की चालाकी जग जाहिर है उसकी आदत मार-मारकर लेने की है। जल्दबाजी में कोई खरीदी इसलिए नहीं करता है कि उसके पास बफर स्टॉक भी रहता है।

नीमच लाइन का व्यापार

पिछले कुछ दिनों से नीमच, मंदसौर के सोया प्लांट आगे का तेल बेचकर छोटे-छोटे लेवाल को भ्रमित करते रहते हैं। 1-2 टैंकर तेल लेने वाले 10 से 20 दिन आगे के तेल की विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें खरीदी कर लेते हैं। माल उठाने के समय कपड़े उतरने जैसी स्थिति बन जाती है। प्लांटों से माल उठता नहीं है और सेटलेंट होते रहते हैं। कई व्यापारियों का तो 780, 755 एवं 740 रुपए का तेल लिखा रखा है। आगे का तेल 730 रुपए खोलकर बैठ गए हैं। पहले प्लांट 1-2 रुपए किलो महंगा बेचते हैं। बाद में भाव नीचे कर देते हैं। एनसीडीईएक्स वायदा कारोबार में फरवरी तक के तेल नीचे बिकने लगे हैं। नीचे भाव का तेल भी कौन खरीदना चाहेगा। खाद्य‌ तेलों में तेजी तो आना नहीं है। ब्राजील की फसल आने के बाद संभव है, नए सिरे एक ओर मंदी का झटका धीरे से लग जावे।

एजेंसियां त्वरित भुगतान करें

किसानों को बैंकोंे से रुपया मांग के अनुसार क्यों नहीं दिया जा रहा है। सरकारी एजेंसियां किसानों की कृषि जिंस खरीद रही है। उनका भुगतान देरी से क्योें किया जाता है। मंडी एक्ट के अनुसार त्वरित भुगतान क्यों नहीं किया जाना चाहिए। सरकारी एजेंसियांे के लिए मंडी एक्ट अलग से विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें नहीं बना है। इसे तोड़ने का अधिकार सरकारी एजेंसियों को नहीं है। देरी से भुगतान की वजह से सरकार की साख खराब हो रही है। यह बात राजनेताओं को समझ में आ जाना चाहिए।

सोया मील बढ़ाने का प्रयास

ब्राजील सोया उद्योग के अिधकारी चीन को सोया मील का निर्यात बढ़ाने के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ पिछले दिनों बातचीत भी की है। पिछले दिनों औद्योगिक समूह अबीवो ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चीन पहले ही ब्राजील से कुल सोयाबीन आयात का 80 प्रतिशत मात्रा खरीद चुका है।

ग्रामीण इलाकों की मांग कम

दीपावली त्योहार माह के प्रथम सप्ताह में आने से अपेक्षा से अधिक धूमधाम से मन गया है। बाजारों की तेजी मंदी को ग्रामीण इलाकों की मांग प्रभावित करती है। चाहे किसानों का सोयाबीन बड़ी मात्रा में बिक रहा हो, किंतु उसके हाथों में रुपया नहीं आ रहा है। थोड़ा बहुत रुपया आता है, वह कीटनाशक बीज, रासायनिक खाद, मजदूरों की मजबूरी देने में चला जाता है। इससे बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदी नहीं कर पाते हैं। बाजार इसी वजह से ठंडा बना हुआ है। कम से कम इस माह के अंत तक तो बना रहता ही है। इस माह की 28 नवंबर को मप्र में विधानसभा के लिए मतदान होना है। अत: मांग पक्ष कमजोर बना रहेगा। केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को नकदी रुपए का भुगतान शुरू कर दें।

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मुद्रा संबंधी एफ.ए.क्यू

व्यापार डेरिवेटिव के लिए न्यूनतम निवेश कितना है?

यह कदम तब आया जब बाज़ार नियामक सेबी ने छोटे निवेशकों को उच्च जोखिम वाले उत्पादों से बचाने के प्रयास में वर्तमान में किसी भी इक्विटी डेरिवेटिव उत्पाद के लिए न्यूनतम निवेश आकार में 2 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक की बढ़ोतरी की।

करेंसी ट्रेडिंग इन इंडिया क्या है और मैं मुद्रा व्यापार कैसे शुरु करूँ?

विदेशी मुद्रा व्यापार, एक मुद्रा का दूसरे में रूपांतरण है। यह दुनिया के सबसे सक्रिय रूप से कारोबार किए जाने वाले बाज़ारों में से एक है, जिसमें औसत दैनिक व्यापार की मात्रा 5 ट्रिलियन डॉलर है।

मैं ऑनलाइन फोरेक्स ट्रेडिंग कैसे कर सकता हूँ?

सभी मुद्रा व्यापार जोड़े में किया जाता है। शेयर बाज़ार के विपरीत, जहाँ आप एकल स्टॉक खरीद या बेच सकते हैं, आपको एक मुद्रा खरीदनी होगी और दूसरी मुद्रा को विदेशी मुद्रा बाज़ार में बेचना होगा। इसके बाद, लगभग सभी मुद्राओं का मूल्य चौथे दशमलव बिंदु तक होगा। बिंदु में प्रतिशत व्यापार की सबसे छोटी वृद्धि है।

भारत में मुद्रा का व्यापार कैसे कर सकता हूँ?

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विदेशी मुद्रा व्यापार से लाभ प्राप्त कैसे करें?

विदेशी मुद्रा व्यापार आपको मुनाफ़ा दे सकती है यदि आप असामान्य रूप से कुशल मुद्रा व्यापारी के साथ धनराशि को छुपा कर रखते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि मुद्राओं में व्यापार करते समय तीन में से एक व्यापारी का पैसा नहीं डूबता, लेकिन यह समृद्ध व्यापार विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के समान नहीं है।

क्या विदेशी मुद्रा व्यापार में कोई जोखिम कारक शामिल है?

विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े का व्यापार शामिल है। कोई भी निवेश जो संभावित लाभ प्रदान करने का प्रस्ताव रखता है उसमें भी मार्जिन पर व्यापार करते समय अपने लेनदेन के मूल्य से बहुत अधिक खोने के बिंदु तक डाउनसाइड जोखिम होता है।

भारतीय विदेशी मुद्रा क्या है?

भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 में कहा गया कि भारत 750 बिलियन यू.एस डॉलर से 1 ट्रिलियन डॉलर तक के विदेशी मुद्रा भंडार को लक्षित कर सकता है। दिसंबर 2019 तक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार मुख्य रूप से यू.एस सरकारी बॉन्ड और संस्थागत बॉन्ड के रूप में यू.एस डॉलर के साथ सोने में लगभग 6% विदेशी संचय से बने हैं ।

बाजार का अर्थ एवं वर्गीकरण

परंतु अर्थशास्त्र में बाजार शब्द का अर्थ इससे अलग है। अर्थशास्त्र के अंतर्गत बाजार शब्द का आशय उस सम्पूर्ण क्षेत्र से है। जहां तक किसी वस्तु के क्रेता व विक्रेता फैले विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें होते हैं तथा उनमे वस्तुओं के खरीदने और बेचने की स्वतंत्र प्रतियोगिता होती है जिसके कारण वस्तु के मूल्य में एकरूपता की प्रवृत्ति पाई जाती है। उसे बाजार कहते है। अर्थशास्त्र में बाजार का वर्गीकरण:-

निम्नलिखित दृष्टिकोण से किया जाता है।

1. क्षेत्र की दृष्टि से
2. समय की दृष्टि से
3. कार्यों की दृष्टि से
4. प्रतियोगिता की दृष्टि से

5. वैधानिकता की दृष्टि से
दोस्तों यहाँ पर हम केवल क्षेत्र की दृष्टि से, समय की दृष्टि से, कार्यों की दृष्टि से बाजार का वर्गीकरण के बारे में जानेंगे।

1. क्षेत्र की दृष्टि से:- क्षेत्र की दृष्टि से बाजार के वर्गीकरण का आधार है कि वस्तु विशेष के क्रेता और विक्रेता कितने क्षेत्र में फैले हुए हैं यह चार प्रकार का होता है।

1.स्थानीय बाजार:- जब किसी वस्तु के क्रेता विक्रेता किसी स्थान विशेष तक ही सीमित होते हैं तब उस वस्तु का बाजार स्थानीय होता है।
स्थानीय बाजार में भारी एवं कम मूल्य वाली वस्तुएं तथा शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएं जैसे ईट दूध और सब्जी आदि आते है।

2. प्रादेशिक बाजार:- जब किसी वस्तु के क्रेता विक्रेता केवल एक ही प्रदेश तक पाये जाते है। तो ऐसा बाजार प्रदेशिक बाजार होता है।
जैसे:- राजस्थान की पगड़ी, और लाख की चूड़ियां केवल राजस्थान में ही इनका प्रयोग किया जाता है। यह अन्य राज्यों में नहीं पाई जाती।
3. राष्ट्रीय बाजार:- किसी वस्तु का क्रय विक्रय केवल उस राष्ट्र तक ही सीमित हो जिस राष्ट्र में वह वस्तु बनाई जाती हैं। तब वस्तु का बाजार राष्ट्रीय होता है।

जैसे:- जवाहर कट धोतियां
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार:- जब किसी वस्तु के क्रेता विक्रेता विश्व के अलग अलग राष्ट्र से वस्तुओं का क्रय विक्रय करते हैं। या किसी वस्तु की मांग देश या विदेश में हो तो उस वस्तु का बाजार अंतराष्ट्रीय होता है।

जैसे:- सोना, चांदी, चाय, गेहूं

2. समय की दृष्टि से:- प्रोफेसर विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें मार्शल ने समय के अनुसार बाजार को 4 वर्गों में बांटा है

1. अति अल्पकालीन बाजार या दैनिक बाजार:- जब किसी वस्तु की मांग बढ़ती है तो उसकी पूर्ति बढ़ाने का समय नहीं मिल पाता तब ऐसे बाजार को अति अल्पकालीन बाजार कहते हैं।

जैसे:- शीघ्र नष्ट हो जाने वाली वस्तुएँ दूध, सब्जी मछली आदि। इनका भंडारण ज्यादा समय तक नही किया जा सकता। ये दैनिक बाजार के अंतर्गत आते है।

2. अल्पकालीन बाजार:- अल्पकालीन बाजार में मांग और पूर्ति के संतुलन के लिए कुछ समय मिलता है। किंतु यहां पर्याप्त नहीं होता। पूर्ति में मांग के अनुसार कुछ सीमा तक घटाया या बढ़ाया जाता है। किंतु यह पर्याप्त नहीं है।

3. दीर्घकालीन बाजार:- जब किसी वस्तु का बाजार कई वर्षों के लंबे समय के लिए होता है तो उसे दीर्घ कालीन बाजार कहते हैं।

अति दीर्घकालीन बाजार:- इस बाजार में उत्पादकों को पूर्ति बढ़ाने के लिए इतना लंबा समय मिल जाता है कि उत्पादक उपभोक्ता के स्वभाव रुचि फैशन आदि के अनुरूप उत्पादन कर सकता है।

3. बिक्री की दृष्टि से
1. सामान्य अथवा मिश्रित बाजार:- मिश्रित बाजार उस बाजार को कहते हैं जिसमें अनेक एवं विविध प्रकार की वस्तुओं का क्रय विक्रय होता है। यहां क्रेताओं की आवश्यकताओं की सभी वस्तुएं उपलब्ध हो जाती है।

2. विशिष्ट बाजार:- यह वह बाजार होते हैं जहाँ किसी विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें वस्तु विशेष का क्रय-विक्रय होता है।

जैसा:- सराफा बाजार, बजाज बाजार, दाल मंडी, गुड मंडी आदि

3. नमूने द्वारा बिक्री का बाजार:- ऐसे बाजार में विक्रेता को विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें अपना संपूर्ण माल कहीं ले जाना नहीं पड़ता है वह माल को देखकर सौदा तय करते हैं सौदा तय होने पर माल गोदाम से भिजवा देते हैं। विश्‍व के बाजारों में ट्रेड करें लोग अपने घर बैठे ही नमूना देखकर उस में चुनाव करके बहुत सा सामान मंगा लेता है।

4. ग्रेड द्वारा विक्री का बाजार:- इस प्रकार के बाजार में वस्तुओं की बिक्री उनके विशेष नाम अथवा ग्रेड द्वारा होती है खरीददार को ना तो वस्तुओं के नमूने दिखाने पढ़ते हैं और ना ही क्रेता को कुछ बताना पड़ता है।

जैसे:- फिलिप्स रेडियो

5. निरीक्षण बाजार:- इस बाजार में निरीक्षण करके उसकी कीमत लगाई जाती है।

जैसे:- गाय, बैल, बकरी, घोड़े आदि

6. ट्रेड मार्का बिक्री बाजार:- बहुत से व्यापारी के माल व्यापार चिन्ह के आधार पर बिकते हैं। उसे ट्रेड मार्का बिक्री बाजार कहते है।
जैसे:- ऊषा मशीन, बिरला सीमेण्ट आदि।

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